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jaisidh

male - 31 years, Delhi, India
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  • !!प्रणय रस!!

    उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
    मैं मैके अपने आई सखी, कई दिन साजन से दूर रही
    मन मयूर मेरा नाच उठा, जब साजन मेरे घर आया
    उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
    एकांत जगह मेरे घर में, बाँहों में मुझको कैद किया
    मेरे होठों को होठों से, सखी जोंक की भांति जकड लिया
    मैं भी न चाहूँ होंठ हटें, साजन को करीब और खीच लिया
    उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
    कुछ हलचल हुई, मैं चौंक गई, साजन को परे हटाय दिया
    रात में मिलूंगी साजन ने, सखी मुझसे वादा धराय लिया
    उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
    जैसे-तैसे तो शाम हुई, रात्रि तो मुझे बड़ी दूर लगी
    होते ही रात सखी साजन को, बहनों ने मेरी घेर लिया
    उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
    हँसी ठिठोली बहनों की, मुझको बिलकुल न भाई सखी
    सिरदर्द के बहाने मैंने तो, बहनों से किनारा काट लिया
    उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
    अपने कमरे में आकर मैं, सखी बिस्तर पर थी लेट गई
    बंद करके आँखें पड़ी रही, साजन के सपनो में डूब गई
    हर आहट पर सखी मैंने तो, साजन को ही आते पाया
    उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
    दरवाज़े खुले फिर बंद हुए, कुण्डी उन पर सरकाई गई
    मैं जान – बूझकर सुन री सखी, निद्रा-मुद्रा में लेट गई
    साजन की सुगंध को मैंने तो, हर साँस में था महसूस किया
    उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
    साजन ने बैठकर बिस्तर पर, मेरे कंधे सहलाए सखी
    गालों पर गहन चुम्बन लेकर, अंगिया की डोर को खींच दिया
    उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया

    नग्न पीठ पर साजन ने, ऊँगली से रेखा खींच दई
    बिजली जैसे मुझमे उतरी, सारे शरीर में दौड़ गई
    निस्वास लेकर फिर मैंने तो, अपनी करवट को बदल लिया
    उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
    करवट तो मात्र बहाना था, बैचेन बदन को चैन कहाँ
    मुझे साजन की खुसबू ने सखी, अंग लगने को मजबूर किया
    उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
    एक हाथ से उसने सुन ओ सखी, स्तन दबाये और भीच लिया
    मैंने गर्दन को ऊपर कर, उसके हाथों को चूम लिया
    दोनों बाँहों से भीच मुझे, साजन ने करीब और खींच लिया
    उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
    साजन ने जोर लगा करके, मोहे अपने ऊपर लिटा लिया
    मेरे तपते होठों को उसने, अपने होठों में कैद किया
    उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
    उसने भींचा मेरा निचला होंठ, मैंने ऊपर का भींच लिया
    दोनों के होंठ यूँ जुड़े सखी, जिह्वाओं ने मिलन का लुत्फ़ लिया
    उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
    साजन ने उठाकर मुझे सखी, पलंग के नीचे फिर खड़ा किया
    खुद बैठा पलंग किनारे पर, मेरा एक-एक वस्त्र उतार दिया
    उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
    मुझे पास खींचकर फिर उसने, स्तनों के चुम्बन गहन लिया
    दोनों हाथों से नितम्ब मेरे, सख्ती से दबाकर भींच लिया
    कई तरह से उनको सहलाया, कई तरह से दबाकर छोड़ दिया
    उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
    स्तन मुट्ठी में जकड सखी, उसने उनको था उभार लिया
    उभरे स्तन को साजन ने, अपने मुंह माहि उतार लिया
    उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया

    बोंडियों को जीभ से उकसाया, होठों से पकड़ उन्हें खींच लिया
    रस चूसा सखी उनसे जी भर, मेरी काम- क्षुधा भड़काय दिया
    उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
    साजन का दस अंगुल का अंग, सखी मेरी तरफ था देख रहा
    उसकी बेताबी समझ सखी, मैंने उसको होठास्थ किया
    उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
    पलंग के कोर बैठा साजन, मैं नीचे थी सखी बैठ गई
    साजन के अंग पर जिह्वा से, मैंने तो चलीं कई चाल नई
    वह ओह-ओह कर चहुंक उठा, मैंने अंग को ऐसा दुलार किया
    उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
    अब सब कुछ था बिपरीत सखी, साजन नीचे मैं पलंग कोर
    जिस तरह से उसने चूसे स्तन, उसी तरह से अंग को चूस लिया
    उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
    उसने अपनी जिह्वा से सखी, अंग को चहूँ ओर से चाट लिया
    बहके अंग के हर हिस्से को, जिह्वा- रस से लिपटाय दिया
    रस में डूबे मेरे अंग में, अन्दर तक जिह्वा उतार दिया
    उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
    मैं पलंग किनारा पकड़ सखी, अंग को उभार कर खड़ी हुई
    साजन ने मेरे नितम्बों पर, दांतों से सिक्के छाप दिया
    उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
    उसके बिपरीत मुख करके सखी, घुटनों के बल मैं बैठ गई
    कंधे तो पलंग पर रहे झुके, नितम्बों को पूर्ण उठाय दिया
    उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
    साजन ने झुककर पीछे से, अंग ऊपर से नीचे चाट लिया
    खुले-उभरे अंग में उसने, जिह्वा को अंग बनाय दिया
    उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
    साजन ने अपने अंग से सखी, मेरे अंग को जी भरके रगडा
    अंग से स्रावित रस में अंग को, सखी पूर्णतया लिपटाय लिया
    उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
    कठोर -सख्त अंग से री सखी, रस टपक-टपक कर गिरता था
    दस अंगुल की चिकनी सख्ती, मेरे अंग के मध्य घुसाय दिया
    उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
    जांघों के सहारे उठे नितम्ब, अब स्पंदन का सुख भोग रहे
    स्पंदन की झकझोर से फिर, स्तन दोलन से डोल रहे
    सीत्कार, सिसकी, उई, आह, ओह, सब वातावरण में घोल दिया
    उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
    ऐसे स्पंदन सखी मैंने, कभी सोचे न महसूस किये
    पूरा अंग बाहर किया सखी, फिर अन्तस्थल तक ठेल दिया
    उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
    मैंने अंग में महसूस करी, अंग की कठोर पर मधुर छुहन
    अंग की रसमय मधुशाला में, अंग ने अंग को मदहोश किया
    उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
    पहले तो थे धीरे-धीरे, अब स्पंदन क्रमशः तेज हुए
    अंग ने अब अंग के अन्दर ही, सुख के थे कई-कई छोर छुए
    तगड़े गहरे स्पंदन से, मेरा रोम-रोम आह्लाद किया
    उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
    साजन ने अब जिह्वा रस की, एक धारा नितम्ब मध्य टपकाई
    उसकी सारी चिकनाई सखी, हमरे अंगों ने सोख लई
    चप-चप, लप-लप की ध्वनियों से, सुख के द्वारों को खोल दिया
    उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
    जैसे-जैसे बड़े स्पंदन, वैसे-वैसे आनंद बड़ा
    हर स्पंदन के साथ सखी, सुख घनघोर घटा सा उमड़ पड़ा
    साजन की आह ओह के संग, मैंने आनंदमय सीत्कार किया
    उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
    वारिस होने के पहले ही, सखी मेरा बांध था टूट गया
    मेरी जांघों ने जैसे की, नितम्बों का साथ था छोड़ दिया
    उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया

    अंग का महल ढह गया सखी, दीर्घ आह ने सुख अभिव्यक्त किया
    मेरे नितम्बों के आँगन पर, साजन ने मोती बिखेर दिया
    साजन के अंग ने मेरे अंग को, सखी अद्भुत यह उपहार दिया
    आह्लादित साजन ने नितम्बों का, मोती के रस से लेप किया
    उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया
    मोती रस से मेरी काम अगन, मोती सी शीतल हुई सखी
    मन की अतृप्त इस धरती पर, घटा उमड़-उमड़ कर के बरसी
    मैंने साजन का सिर खीच सखी, अपने बक्षों में छुपाय लिया
    उस रात की बात न पूँछ सखी, जब साजन ने खोली अँगिया

  • Love letter

    प्रथम प्यार का, प्रथम पत्र है
    लिखता, निज मृगनयनी को
    उमड़ रहे, जो भाव ह्रदय में
    अर्पित , प्रणय संगिनी को ,
    इस आशा के साथ, कि समझें भाषा प्रेमालाप की !
    प्रेयसि पहली बारलिख रहा,चिट्ठी तुमको प्यार की !

    अक्षर बन कर जनम लिया
    है , मेरे मन के भावों ने !
    दवे हुए जो बरसों से थे
    भड़क उठे अंगारों से
    शब्द नहीं लिखे हैं , इसमें भाषा ह्रदयोदगार की !
    आशा है सम्मान करोगी, प्यार भरे अरमान की !

    तुम्हें द्रष्टिभर जिस दिन
    देखा उन सतरंगी रंगों में
    भूल गया मैं रंग पुराने ,
    भरे हुए थे स्मृति में !
    उसी समय से पढनी सीखी , गीता अपने प्यार की !
    प्रियतम पहली बार गा रहा, मधुर रागिनी प्यार की !

    प्रथम मिलन के शब्द, स्वर्ण
    अक्षर से लिख मानसपट पर
    गूँज रहे हैं मन में अब ,
    जब पास नहीं , तुम मेरे हो !
    निज मन की बतलाऊँ कैसे ? बातें हैं अहसास की !
    बहुत आ रही मुझे सुहासिन याद तुम्हारे प्यार की !

  • **~!!! सच्चे प्यार की ये बी

    A – अपनापन रखा करो सबसे

    B – बहारों के साथ प्यार के गीत गाओ

    C – चाहत के नशे मै बीना सोचे डूब जाओ

    D – दिल के ज़रोखे मै बैठा करो

    E – इश्वर से बातें किया करो

    F – फ़ना हो जाओ किसी के प्यार मै

    G -गीत के हर लब्ज गुन गुनाओ

    H – हर पल खुश रहा करो

    I – इशारो मै दिल की बातें किया करो

    J – जिंदगी बनालो प्यार को

    K -कभी अपनों से कफा मत रहा करो

    L -लाखो मै एक है हमारा प्यार ऐसा समजा करो

    M -मन से चाहो दिलदार को

    N -नफ़रत की आंधी को कभी आने ही ना दो

    O -ओ जाने वाले लौट के आजा ऐसा पैगाम दिल से लिखा करो

    P -प्यार करो तो उसे दिलोजान से निभाओ

    Q -क्यूँकी सच्चे प्यार मै मिलना जरुरी नहीं होता

    R -राहें केसी भी हो लेकिन यार का साथ ना छोड़ो

    S – सनम को अपना आईना बनाकर उसे देख कर सँवर लिया करो

    T -तेज धुप मै तुम खुद छाता बनकर उसकी रक्षा करो

    U -उसे कभी ये अहेसास ना होने दो की वो अकेला है

    V -वादा करो प्यार मै तो उसे निभाने की कोसिस करो

    W -विस करो ख़ुदासे की हम जिसे चाहतें है वो हर पल खुश रहें

    X -अक्स शब्दों मै जीना शिख लो

    Y -यादों के सहारे जीना शिख लो

    Z -ज़ख्म केसे भी हो प्यार के सहन किया करो ये abcd का आखरी वर्ड भी हमे यही शिखाता हैं की हर तकलीफ मै हमे अड़ग रहेना चाहिए फिर अच्छे दिन अपने आप ही आ जाते है

  • Meri Tanhai

    लोग कहते हैं हुई थी बारिश उस रोज़,
    उन्हें क्या पता ग़म-ए-हिज़्र में रोया था कोई।

    यूँ साए देख कर खुश होते हैं सब ग़ाफ़िल,
    उन्हें क्या पता कल धूप में सोया था कोई।

    कतरा-कतरा कर के मुस्कुराते हैं सभी,
    उन्हें क्या पता चश़्म-ए-तर का रोया था कोई।

    मंज़िल-ए-आखिर को चलते हैं अब राहिल,
    उन्हें क्या पता इन राहों पर खोया था कोई।

    रहते है साथ साथ मै और मेरी तनहाई--
    करते है राज की बात मै और मेरी तनहाई--

    दिन तो गुज्ञर जाता है लोगों की भीर मे--
    करते है बसर रात मै और मेरी तनहाई--

    सांसो का क्या भरोसा कब छोड जाये साथ--
    लेकिन रहेंगे साथ मै और मेरी तनहाई--

    आए ना तुम्हे याद कभी भूल कर भी शायद--
    करते है याद तुम्हे मै और मेरी तनहाई--

    आ के पास क्यं दूर हो गये--?????
    करते हैं तुम्हारा इंतजार मै और मेरी तनहाई--

  • dost

    कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं ,
    तुम कह देना कोई ख़ास नहीं .
    एक दोस्त है कच्चा पक्का सा ,
    एक झूठ है आधा सच्चा सा .
    जज़्बात को ढके एक पर्दा बस ,
    एक बहाना है अच्छा अच्छा सा .
    जीवन का एक ऐसा साथी है ,
    जो दूर हो के पास नहीं .
    कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं ,
    तुम कह देना कोई ख़ास नहीं .
    हवा का एक सुहाना झोंका है ,
    कभी नाज़ुक तो कभी तुफानो सा .
    शक्ल देख कर जो नज़रें झुका ले ,
    कभी अपना तो कभी बेगानों सा .
    जिंदगी का एक ऐसा हमसफ़र ,
    जो समंदर है , पर दिल को प्यास नहीं .
    कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं ,
    तुम कह देना कोई ख़ास नहीं .
    एक साथी जो अनकही कुछ बातें कह जाता है ,
    यादों में जिसका एक धुंधला चेहरा रह जाता है .
    यूँ तो उसके न होने का कुछ गम नहीं ,
    पर कभी - कभी आँखों से आंसू बन के बह जाता है .
    यूँ रहता तो मेरे तसव्वुर में है ,
    पर इन आँखों को उसकी तलाश नहीं .
    कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं ,
    तुम कह देना कोई ख़ास नहीं ...

  • ek ahsas

    agar tum
    munaasib samjho
    toh main tumse
    do baate kar toh lu...

    kab se rakhi hai
    mere dil main
    tumhare liye samvednaye
    woh sab
    aaj tumse keh toh lu...

    dhoop kitni hai
    garmi kitni hai
    piyaas kitni hai
    chhaya bhi kahi nahi hai
    kaho toh sirr pe tumhare
    pallu se main saya kar toh lu...

    kitni khaamosh ho tum
    tasveer ki taraha
    sochta hu
    ab bologi
    tumhare kapkapate
    surkh labo pe
    thehre lafzo ko
    zara main ek baar
    phir se sunn toh lu...

    bahut mushkil se
    'aap ' se 'tum' pe aai ho
    ek faasle pe tha jo haath
    tum zara paas laaye ho
    itnaa nazdik aane ka
    ek ehsaas tumse le toh lu...

  • yad

    नैनो मे बसे है ज़रा याद रखना,
    अगर काम पड़े तो याद करना,
    मुझे तो आदत है आपको याद करने की,
    अगर हिचकी आए तो माफ़ करना.......
    ये दुनिया वाले भी बड़े अजीब होते है
    कभी दूर तो कभी क़रीब होते है
    दर्द ना बताओ तो हमे कायर कहते है
    और दर्द बताओ तो हमे शायर कहते है .......
    एक मुलाक़ात करो हमसे इनायत समझकर,
    हर चीज़ का हिसाब देंगे क़यामत समझकर,
    मेरी दोस्ती पे कभी शक ना करना,
    हम दोस्ती भी करते है इबादत समझकर.........
    ख़ामोशियों की वो धीमी सी आवाज़ है ,
    तन्हाइयों मे वो एक गहरा राज़ है ,
    मिलते नही है सबको ऐसे दोस्त ,
    आप जो मिले हो हमे ख़ुद पे नाज़ है

  • wait

    मत इंतज़ार कराओ हमे इतना
    कि वक़्त के फैसले पर अफ़सोस हो जाये
    क्या
    पता कल तुम लौटकर आओ
    और हम खामोश हो जाएँ

    दूरियों से फर्क पड़ता
    नहीं
    बात तो दिलों कि नज़दीकियों से होती है
    दोस्ती तो कुछ आप जैसो
    से है
    वरना मुलाकात तो जाने कितनों से होती है

    दिल से खेलना हमे
    आता नहीं
    इसलिये इश्क की बाजी हम हार गए
    शायद मेरी जिन्दगी से बहुत
    प्यार था उन्हें
    इसलिये मुझे जिंदा ही मार गए

    मना लूँगा आपको
    रुठकर तो देखो,
    जोड़ लूँगा आपको टूटकर तो देखो।
    नादाँ हूँ पर इतना भी
    नहीं ,
    थाम लूँगा आपको छूट कर तो देखो।

    लोग मोहब्बत को खुदा का
    नाम देते है,
    कोई करता है तो इल्जाम देते है।
    कहते है पत्थर दिल रोया
    नही करते,
    और पत्थर के रोने को झरने का नाम देते है।

    भीगी आँखों
    से मुस्कराने में मज़ा और है,
    हसते हँसते पलके भीगने में मज़ा और है,
    बात
    कहके तो कोई भी समझलेता है,
    पर खामोशी कोई समझे तो मज़ा और है...!

    मुस्कराना
    ही ख़ुशी नहीं होती,
    उम्र बिताना ही ज़िन्दगी नहीं होती,
    दोस्त को
    रोज याद करना पड़ता है,
    दोस्ती कर लेनी हीं दोस्ती नहीं होती

  • hichkiya

    हिचकियों से एक बात का पता चलता है,
    कि कोई हमे याद तो करता है,
    बात न करे तो क्या हुआ,
    कोई आज भी हम पर कुछ लम्हे बरबाद तो करता है

    ज़िंदगी हमेशा पाने के लिए नही होती,
    हर बात समझाने के लिए नही होती,
    याद तो अक्सर आती है आप की,
    लकिन हर याद जताने के लिए नही होती

    महफिल न सही तन्हाई तो मिलती है,
    मिलन न सही जुदाई तो मिलती है,
    कौन कहता है मोहब्बत में कुछ नही मिलता,
    वफ़ा न सही बेवफाई तो मिलती है

    कितनी जल्दी ये मुलाक़ात गुज़र जाती है
    प्यास भुजती नही बरसात गुज़र जाती है
    अपनी यादों से कह दो कि यहाँ न आया करे
    नींद आती नही और रात गुज़र जाती है

    उमर की राह मे रस्ते बदल जाते हैं,
    वक्त की आंधी में इन्सान बदल जाते हैं,
    सोचते हैं तुम्हें इतना याद न करें,
    लेकिन आंखें बंद करते ही इरादे बदल जाते हैं

    कभी कभी दिल उदास होता है
    हल्का हल्का सा आँखों को एहसास होता है
    छलकती है मेरी भी आँखों से नमी
    जब तुम्हारे दूर होने का एहसास होता है

  • khubsurti?

    कल मैने खुदा से पूछा कि खूबसूरती क्या है?
    तो वो बोले

    खूबसूरत है वो लब जिन पर दूसरों के लिए एक दुआ है

    खूबसूरत है वो मुस्कान जो दूसरों की खुशी देख कर खिल जाए

    खूबसूरत है वो दिल जो किसी के दुख मे शामिल हो जाए और किसी के प्यार के रंग मे रंग जाए

    खूबसूरत है वो जज़बात जो दूसरो की भावनाओं को समझे

    खूबसूरत है वो एहसास जिस मे प्यार की मिठास हो

    खूबसूरत है वो बातें जिनमे शामिल हों दोस्ती और प्यार की किस्से कहानियाँ

    खूबसूरत है वो आँखे जिनमे कितने खूबसूरत ख्वाब समा जाएँ

    खूबसूरत है वो आसूँ जो किसी के ग़म मे बह जाएँ

    खूबसूरत है वो हाथ जो किसी के लिए मुश्किल के वक्त सहारा बन जाए

    खूबसूरत है वो कदम जो अमन और शान्ति का रास्ता तय कर जाएँ

    खूबसूरत है वो सोच जिस मे पूरी दुनिया की भलाई का ख्याल ho !

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