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dipkumar

male - 56 years, Surat, India
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  • आज मर जाऊँगी

    आज मैं भी अपना एक ख़ुद का अनुभव लिख रहा हूँ, यह जो मैं कहानी सुनाने जा रहा हूँ वो मेरी चाची और मेरी है। पहले मैं अपने और चाची के बारे में बताना चाहूँगा, मेरा नाम सुशान्त हैं. कानपुर का रहने वाला हूँ, अभी उच्च अध्ययन कर रहा हूँ। कॉलेज में मैं बहुत सी लड़कियों को चोद चुका हूँ। मेरी उम्र 23 साल है, कद 5 फीट 9 इंच है, अच्छा खासा व्यक्तित्व है, मेरा लंड 7.5 इंच लम्बा है और बहुत मोटा है। मेरी चाची की उमर 31 साल हैं नाम अनीता(बदला हुआ), ऊँचाई 5 फीट 5 इंच, वक्ष का आकार 38 लगभग, 38-29-38. रंग गेहुँआ, लम्बे घने बाल, गांड तक आते हैं, जब वह मटक मटक कर चलती है सबकी पागल कर देती है।

    अच्छा, अब मैं कहानी पर आता हूँ।

    हमारे घर में कुल दस लोग रहते हैं, गर्मी के वजह से मैं, मेरे चाचा, मेरी चाची और एक दूसरी चाची की बेटी छत पर सोते थे, बाकी सब लोग नीचे सोते थे।

    एक रात मैंने चाची की सिसकारियों की आवाज़ सुनी, मैं जाग गया। चाची सिसकारियाँ भर रही थी। मैं समझ गया कि चाचा चाची को चोद रहे हैं। मैं हल्के से अपने मुँह के ऊपर से चादर उठा कर देखने लगा।

    चाचा चाची की चूत चाट रहे थे, चाची पूरी नंगी थी ! उनके वो रेशमी बाल जो मुझे हमेशा पागल कर देते हैं, वो खुले हुए थे। चाची बुरी तरह सिसकार रही थी। मैं तो वैसे ही गर्म हुए जा रहा था। फिर शायद चाचा ने चाची की चूत में काटा तो चाची चिल्ला दी !

    जल्दी से चाचा ने अपना हाथ उनके मुँह पर रख दिया और बोले- चिल्ला क्यों रही हो? बच्चे जाग जाएँगे !

    चाची बोली- ऐसे करोगे तो चिल्लाऊँगी ही !

    तो चाचा बोले- अच्छा, आराम से करता हूँ !

    और फिर चाची की चूत चाटने लगे।

    चाची फिर से सिसकारियाँ भरने लगी- आआह्ह्ह्ह्ह् य्य्य्याआ ! क्या कर रहे हो ! फाड़ दोगे क्या ! मैं कही भागी नहीं जा रही हूँ ! हाआअ आआआह्ह्ह्ह !

    फिर चाचा ऊपर आ गए और चाची को बोले- ले अब मुँह खोल ... और चूस इसे !

    चाचा का लण्ड चाची के मुँह में था और वो उसे मज़े से चूस रही थी, आवाज़ निकल रही थी- पिपिच्चच पिच्च्च्चक पिच्च्च्चच्च्च्क !

    फिर चाची बोली- आज तुम्हारा निकल रहा है !

    तो चाचा बोले- पी जा उसे !

    चाची ने सारा का सारा मुठ पी लिया ! फिर चाची ऊपर आई और चाचा के ऊपर लेट कर उनके होटों को कस के चूसने लगी ! कम से कम दस मिनट तक चूमा चाटी का कार्यक्रम चला।

    इधर मेरे लण्ड की बुरी हालत हो रही थी। अगर मैं हिलता तो उन्हें पता लग जाता कि मैं जगा हुआ हूँ। मैं शांति से देखने लगा, तो देखा कि चाची फिर से नीचे आ गई और चाचा धीरे से अपना लण्ड चाची की चूत में घुसा रहे थे ! देखते देखते चाचा का लंड गायब हो गया। फिर चाचा ने झटके लगाना शुरू किये, नीचे से चाची चूतड़ उठा-उठा कर साथ दे रही थी !

    फिर से चाची की आवाज़े निकलना शुरू हो गई- धीईरे....... धीईर्र......!

    बीस मिनट की जम के चुदाई के बाद चाचा शांत पड़ गए, मैं समझ गया की चाचा झड़ गए !

    फिर कुछ देर बाद चाचा चाची के ऊपर से हटे और दोनों ने कपड़े पहने और सो गए ! पर मैं तो रात भर सोचता रहा चाची के बारे में !

    मैंने भी ठानी कि एक बार तो चाची की चूत जरुर मारूँगा ! अब तो रोज़ मैं चाची और चाची का कार्यक्रम देखता ! मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूँ !

    एक दिन चाची के कमरे में गया तो वह कोई नहीं था, बाथरूम से पानी गिरने की आवाज़ आ रही थी, चाची नहा रही है ! मैंने सोचा कि क्यों न चाची को नहाते देखूँ !

    मैं बगल वाले संडास में नल पर पैर रख कर देखने लगा !

    क्या नज़ारा था ! चाची के वो लम्बे खुले बाल ! चूचों पर बहता पानी ! वो अपनी झांटों को साफ़ कर रही थी ! एकदम से मेरा पैर फिसल गया और मैं गिर गया !

    चाची चिल्लाई- कौन है?

    जब तक वह बाहर आकर देखती, मैं धीरे से वहाँ से भाग लिया !

    उन्होंने शायद मुझे पहचान लिया था, चाची का मेरी तरफ बात करने का ढंग कुछ बदल गया था ! पर मुझे तो हर रोज़ रात को मुफ्त का प्रोग्राम देखने को मिलता था !

    मेरे एक और चाचा थे वो दिल्ली में रहते थे ! अचानक वे बीमार पड़ गए ! तो चाचा और मेरे पिता जी को जाना पड़ा दिल्ली ! एक दो दिन बाद पिताजी तो आ गए पर चाचा को वहीं एक महीने रुकना पड़ेगा ! क्योकि दिल्ली वाले चाचा जी अकेले रहते थे !

    यह सुनते ही जैसे चाची की तो जान ही निकल गई ! अब छत पर सिर्फ मैं और चाची सोते थे ! कुछ दिन तो कुछ नहीं हुआ ! पर चाची की चुदास बढ़ती जा रही थी ! बिना चुदाई के वह रात में सो नहीं पाती थी, हमेशा करवट बदलती दिखती थी, कई बार तो मैंने देखा कि चाची अपनी चूत रगड़ रही हैं।

    फिर मैंने बड़ी हिम्मत की कि कुछ भी हो जाए, अब तो चाची को चोदना है।

    अगले दिन फिर से चाची आई और अपने बिस्तर पर सोने लगी। मैं सोने का नाटक कर रहा था पर उनकी तरफ ही देख रहा था। मैंने देखा की चाची करवटें बदल रही थी और अपनी चूत को सहला रही थी।

    फिर जो हुआ मैं देख कर घबरा गया !

    चाची का हाथ अंदर-बाहर के जैसे हिल रहा था ! मैं समझ गया कि चाची के हाथ में कुछ है ! रात के अँधेरे की वजह से दिख नहीं पाया कि क्या था ! फिर चाची की सिसकारियाँ शुरू हो गई और थोड़ी देर में वह शांत होकर सो गई ! मैं उस दिन भी कुछ नहीं कर पाया, फिर थोड़ी देर में मैं भी सो गया।

    अगली रात को मैं तैयार था जो हो जाए आज तो बोल के रहूँगा !

    मैंने जल्दी से छत पर जाकर अपना बिस्तर लगा दिया और सोने का नाटक करने लगा। करीब 11 बजे चाची आई और अपने बिस्तर पर सोने लगी। मैं जाग रहा था पर सोने का नाटक कर रहा था। फिर थोड़ी देर में चाची का वही रगड़ना चालू हुआ और फिर हाथ अंदर बाहर हिलना !

    मैं हिम्मत करके धीरे से बोला- क्या मैं कुछ मदद कर सकता हूँ?

    चाची घबरा गई, जल्दी से अपनी साड़ी ठीक करने लगी और मेरी तरफ देख कर बोली- क्या तुम जाग रहे हो?

    तो मैं बोला- नहीं, नींद में बड़बड़ा रहा हूँ !

    तो चाची समझ गई कि मैं क्या चाहता हूँ !

    आज चाची से भी न रहा जा रहा था तो उन्होंने पूछ लिया- उस दिन तुमने ही मुझे नहाते देखा था न ?

    मैंने धीरे से हाँ बोला !

    तो चाची मेरे पास आई और बोली- चल आज मैं तेरे साथ सोऊँगी तेरे बिस्तर पर !

    फिर चाची मेरे से सट कर लेट गई और बोली- बेटा, तेरे चाचा नहीं है तो मुझे नींद नहीं आ रही है, क्या करूँ ?

    मैं बोला- चाचा नहीं है तो क्या हुआ, मैं तो हूँ।

    तो बोली- तू क्या कर सकता है?

    मैं बोला- चाचा कर सकते हैं, मैं भी कर सकता हूँ, आजमा कर तो देखो ! चाचा को छोड़ कर मेरे साथ सोने को तरसोगी !

    चाची जोश में आकर मेरे अंडरवीयर के ऊपर से ही मेरा लंड पकड़ लिया और बोली- लगता है काफी तगड़ा है तेरा लण्ड तो !

    मैंने कहा- अभी तो बाहर से देखा है ! अंदर लो तो मज़ा आएगा !

    तो बोली- अच्छा !

    फिर धीरे से अपना हाथ मेरे अंडरवीयर के अंदर डाल कर लण्ड को सहलाने लगी ! फिर मैंने भी उनके शरीर को छूना शुरू कर दिया, धीरे धीरे मैं उनके मम्मे को दबाने लगा। फिर मैं चाची के ब्लाउज़ के हुक खोलने लगा, वह मेरे लण्ड के साथ खेलने में मस्त थी। मैंने उनके मम्मे को नंगा कर दिया और उससे खेलने लगा। एक हाथ उनके मम्मे पर और दूसरा हाथ उनकी साड़ी के अंदर डालने की कोशिश करने लगा।

    मैं उनकी चूत रगड़ रहा था और एक मम्मे को मुँह में ले लिया और कस कर चूस रहा था। इतने में चाची की सिसकारियाँ शुरू हो गई ! चाची अब बहुत गर्म हो चुकी थी। मैंने धीरे से चाची के सारे कपड़े उतार दिए और चाची ने मेरे सारे कपडे उतार दिए, हम दोनों पूरे नंगे थे।

    जैसे ही चाची ने मेरा लंड देखा तो बोली- कितना बड़ा है तेरा लंड और मोटा भी ! मैं तो आज मर जाऊँगी !!!

    मैंने धीरे से पूछा- क्या मैं आपकी चूत चाट सकता हूँ?

    तो वो बोली- तेरी ही है, जो मन में आए, कर !

    मैंने धीरे से चाची की चुत को छुआ तो देखा कि वो पहले से गीली है। मैंने धीरे से अपनी जीभ उनकी चूत पर लगाई, उन्हें तो जैसे करंट लग गया हो !

    मैं उनकी चूत का स्वाद लेने लगा ! फिर मैंने धीरे से उनके दाने को छेड़ दिया ! वह कसमसा गई, बोली- जान लोगे क्या !

    और तेज तेज सिसकारियाँ लेने लगी, उनकी सिसकारियों से मैं पागल हुए जा रहा था ! मैं अपनी जीभ उनकी चूत के अंदर बाहर करने लगा, उनकी सिसकारियाँ और तेज होती गई! फिर मैंने पूछा कि चाची क्या तुम मुझसे चुदवाओगी?

    तो वो बोली- अभी जब तक तेरे चाचा नहीं आते तब तक चोदो, बाद में तुम मुझे होटल में ले जाकर चोद सकते हो !

    मैं फिर से चाची की चूत चाटने लगा और 2 मिनट के बाद चाची झड़ गई ! फिर बोली- ला ! मुझे तेरा लंड चूसना है !

    मैंने अपना लण्ड चाची के मुँह के पास रखा, चाची उसे चूसने लगी। मैं तो जैसे जन्नत में था !

    चाची को बहुत अच्छे से चूसना आता था, चाची कस कस कर मेरे लंड को चूस रही थी। मैं उनके मम्मों को कस कस कर दबा रहा था। बीच बीच में उनके चुचूक भी नोच रहा था जिससे चाची को दर्द हो रहा था और वो मेरे लंड की काटने के जैसा करती !! मुझे बहुत मज़ा आ रहा था !

    15 मिनट चूसने के बाद मैं झड़ने वाला था तो मैं चाची से बोला- मेरा निकलने वाला है !

    तो चाची बोली- मेरे मुंह में ही निकाल दे !

    मैंने चाची के मुँह में अपना पूरा पानी छोड़ दिया ! चाची ने मस्त होकर पूरा लण्ड साफ कर दिया ! मेरा लण्ड थोड़ा ढीला हो गया तो वो उसे चूसती रही जिससे फिर कुछ देर में वह खड़ा हो गया।हम दोनों बहुत गर्म हो चुके थे !

    अब न मुझसे सबर हो रहा था न ही चाची से, दोनों पागल हो चुके थे।

    मैंने चाची को नीचे लिटाया और खुद उनके ऊपर आ गया, अपने लंड को उनकी चूत में सटाया और हल्का से झटका मारा तो मेरा आधा लंड अंदर गया और चाची चिल्ला उठी- आआईईईईऐऐअ मर गाईईईई आआआअ !

    मैं कुछ देर के लिए रुका फिर अपना पूरा लंड उनकी चूत में घुसा दिया, उन्हें बहुत दर्द हो रहा था ! मैं कुछ देर के लिए वैसे ही रुका रहा, मेरा लंड चाची की चूत में और मैं चाची के ऊपर उनके मम्मों को चूस रहा था। थोड़ी देर बाद चाची अपने चूतड़ हिलाने लगी तो मैं समझ गया कि चाची को अब दर्द नहीं हो रहा है, मैंने धीरे धीरे झटके लगाने शुरू कर दिए, चाची को भी अच्छा लग रहा था ! उनकी सिसकारियों ने मुझे पागल कर दिया ! मैं जम के चोद रहा था उनको !

    करीबन 25-30 मिनट तक चोदने के बाद मैं झड़ने वाला था, उतने में चाची दो बार झड़ चुकी थी। मैंने चाची को बताया तो बोली- अन्दर ही झाड़ दो !

    मेरी गति तेज़ होती गई, फिर मैं और चाची साथ में झड गए। मैं कुछ देर चाची के ऊपर लेटा रहा ! ढीला लंड चाची की चूत में ही था और मैं चाची को खूब चूम रहा था, साथ में उनके मम्मे दबा रहा था। फिर थोड़ी देर बाद मैं उठा और हम दोनों ने कपड़े पहने और फिर दोनों बिस्तर जोड़ कर सो गए।

    फिर तो हर रात को हम यही करते !

    करीबन दो हफ्ते हमने खूब चुदाई की ! फिर चाचा के आने की खबर मिली तो आखरी रात को मैंने चाची को तीन बार चोदा। फिर चाचा आ गए।

    उस रात चाचा ने जब चाची को चोदा तो चाची की सिसकारियाँ नहीं निकल रही थी और चाचा के लंड को आराम से सह रही थी ! मैं भी वहीं लेटे लेटे देख रहा था।

    फिर तो हमें जब मौका मिलता, हम शुरू हो जाते !

    कई बार तो मैंने चाची को होटल में ले जाकर चोदा ! वह कहानी अगली बार लिखूंगा !

    आपके मेल्स का मुझे इंतज़ार रहेगा !

  • इस धरती पर शायद ही ऐसा क

    इस धरती पर शायद ही ऐसा कोई पुरुष होगा जिसे अपना लंड चुसवाना अच्छा नहीं लगता होगा। ज़्यादातर लोग इसकी कामना ही करके रह जाते हैं क्योंकि उनकी पत्नी या प्रेमिका इस क्रिया में दिलचस्पी नहीं रखतीं। कुछ लड़कियां इसे गन्दा समझती हैं और कई ऐसी हैं जिन्हें पता नहीं कि क्या करना होता है।

    सबसे ज़रूरी जानने योग्य बात तो यह है कि लंड चूसना एक सुरक्षित क्रिया है जिससे लड़की को कोई भय नहीं होना चाहिए। लंड चूसने से वह गर्भ धारण नहीं कर सकती और अगर वह कुंवारी है तो अपने कुंवारेपन को कायम रखते हुए अपने प्रेमी को अद्भुत आनंद प्रदान कर सकती है। पुरुष के लिए यह सम्भोग के समान आनंद-दायक क्रिया होती है। अगर उसकी प्रेमिका प्यार से उसका लंड चूसती रहे तो उसे सम्भोग की कमी महसूस नहीं होगी। उधर लड़की को भी इसक्रिया में बहुत आनंद आ सकता है बशर्ते उसे सही तरीका आता हो और उसके मन में इस क्रिया के प्रति कोई गलत धारणाएँ ना हों।

    इस लेख के द्वारा मैं लड़कियों के लिए लंड चूसने और लड़कों के लिए लंड चुसवाने की सही विधि बताऊँगा जिससे आप इस अति-सुखदायक क्रिया का पूरा आनंद उठा सकेंगे। इस क्रिया में ज्यादा सक्रिय भूमिका लड़की की होती है और लड़के को आनंद उठाने के अलावा कुछ ज्यादा नहीं करना होता। ठीक इसी प्रकार चूत चुसवाने की क्रिया भी होती है जिसमे लड़का क्रियाशील होता है और लड़की सिर्फ आनंद उठाती है। चूत चुसवाने और चूसने की विधि अगले लेख में प्रस्तुत करूंगा।

    तैयारी- पुरुष की

    लंड चुसवाने के लिए यह अत्यंत ज़रूरी है कि लंड और उसके आस-पास का इलाका एकदम साफ़-सुथरा होना चाहिए। यह हर पुरुष की ज़िम्मेदारी है कि अपने लिंग को हर समय साफ़ रखे, ख़ास तौर से यौन-संसर्ग के समय। यह उस समय और भी ज़रूरी हो जाता है जब अपने लिंग को किसी के मुँह में डालने की उम्मीद रखते हों। लंड सफाई को एक मजेदार रूप दिया जा सकता है अगर आप के पास बाथरूम की सहूलियत है या तो अपने लिंग को आप खुद पानी से धो कर साफ़ कर सकते हो या आपकी प्रेमिका यह कर सकती है। वैसे भी मैथुन से पहले साथ-साथ स्नान करना बहुत अच्छा रहता है। स्नान के दौरान एक दूसरे के शरीर के साथ खिलवाड़ कर सकते हैं और सम्भोग के लिए उत्तेजना पैदा कर सकते हैं। साथ-साथ स्नान एक बहुत ही मज़ेदार रति-क्रिया हो सकती है। लिंग साफ़ करते वक़्त लंड के सुपारे की ऊपरी परत को अच्छे से खोल कर साफ़ करें और नाभि से नीचे तथा जाँघों से ऊपर के सभी हिस्से साफ़ कर लें। ख़ास तौर से चूतड़ और गांड के छेद को भी धो लें। लड़की को लंड चूसते वक़्त तुम्हारी निम्न शरीर की कोई दुर्गंध नहीं आनी चाहिए। अगर पहली बार में दुर्गंध आएगी तो वह दुबारा कभी लंड चूसने के लिए राज़ी नहीं होगी।

    बेहतर होगा अगर लड़के अपने जघन के बालों (अंडकोष के आस-पास के बाल) को क़तर के थोड़ा छोटा कर लें। यह ज़रूरी नहीं है लेकिन ऐसा करने से लड़की को सहूलियत होगी। ध्यान रखें कि बाल ज्यादा छोटे नहीं काटें नहीं तो लड़की के मुँह में चुभेंगे।

    तैयारी- लड़की की

    पहली बार लंड चूसने के लिए सबसे महत्वपूर्ण तैयारी मानसिक होती है जिसमें लंड के प्रति गलत धारणाओं को मन से निकालना होगा। लंड अगर साफ़ सुथरा हो तो एक अत्यंत प्यारा और रोचक अंग होता है। किसी भी आदमी के लंड के कई रूप होते हैं और यह अलग-अलग अवस्थाओं में अपना रूप, आकार और माप बदलता रहता है। यह छोटा और बड़ा हो सकता है, सख्त या मुलायम हो सकता है और लचीला या कठोर हो सकता है। लंड अपना रूप अपने आप बदलता है और इसमें पुरुष की मर्ज़ी नहीं चलती। अच्छा ही है क्योंकि अगर पुरुष अपनी मर्ज़ी से अपने लंड को खडा कर पाता तो लड़कियों के लिए जीवन दूभर हो जाता।

    साफ़ सुथरे लंड में कोई दुर्गंध नहीं होती और चूत के मुक़ाबले इसमें से कोई द्रव्य नहीं रिसता जब तक वह वीर्य नहीं उगलता।

    लड़कियों को यह भी पता होना चाहिए कि जब एक लंड उत्तेजित हो जाता है (यानि खड़ा हो जाता है) तो उसकी पेशाब की नली बंद हो जाती है और वह मूत्र नहीं कर सकता। कहने का मतलब कि वह तुम्हारे मुँह में पेशाब नहीं कर सकता। उत्तेजना के बाद जब लंड शिथिल पड़ जाता है तो भी पेशाब करने के लिए कुछ समय लगता है। तो यह डर भी लड़कियों को नहीं होना चाहिए।

    मानसिक तौर से लड़कियों को लंड से प्यार करना चाहिए क्योंकि शरीर के दूसरे अंगों की माफ़िक़ इसको भी चूमा और चूसा जा सकता है। बहुत सी लड़कियां तो लंड चूसने में बहुत मज़ा लेती हैं। मानसिक तैयारी के अलावा कोई ख़ास तैयारी लड़कियों को नहीं करनी होती। अगर तुम चाहो तो एक अभ्यास कर सकती हो जिससे उत्तेजित लंड को पूरा चूसने में कठिनाई नहीं होगी।

    मुँह का अभ्यास

    इस अभ्यास का उद्देश्य धीरे धीरे अपने मुँह के आकार को बड़ा करना है जिससे एक पूरा मर्दाना लंड तुम्हारे मुँह में समा जाये और तुम्हें दम घुटने या सांस रुकने की समस्या ना हो। इसके लिए तुम्हें कुछ समय तक अभ्यास करना होगा क्योंकि यह योग्यता अचानक नहीं आ सकती। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि तुम अभी से लंड नहीं चूस सकती हो। लंड तो चूस सकती हो लेकिन इसमें महारत हासिल करने के लिए मुँह और गले को इस काबिल बनाना होगा कि 5-7 इंच का तना हुआ लंड मुँह में निगल सको। यह लंड चूसने की उन्नत स्थिति है और हर लड़की को इसे पाने की कोशिश करनी चाहिए क्योंकि इस कला को पाने के बाद तुम किसी भी मर्द को अपने वश में आसानी से कर सकती हो।

    इसके लिए तुम्हें क्रमशः बढ़ते हुए आकार के ऐसे फल या सब्जियाँ चाहिएँ जिन्हें तुम मुँह में ले सकती हो। इनमें केला, खीरा, ककड़ी, लम्बे बैंगन इत्यादि उचित हैं। शुरू में छोटे आकार के फल इस्तेमाल करें और धीरे धीरे एक विकसित लंड के आकार से थोड़े बड़े आकार के फल के साथ अभ्यास करें।

    अभ्यास करने के लिए जीभ को बाहर रखते हुए फल को मुँह के जितना अन्दर डाल सकती हो डाल कर अन्दर-बाहर करो। जब एक आकार के फल के साथ मुँह की क्षमता हासिल हो जाए तो उससे थोड़े बड़े आकार के फल के साथ अभ्यास करो। शुरू में मुश्किल होगी लेकिन धीरे-धीरे मुँह आदि हो जायेगा और 6-7 इंच लम्बे और 2-3 इंच चौड़े आकार के केले या खीरे अपने मुँह में ले पाओगी। जब ऐसा हो जाये तो तुम्हारा अभ्यास पूरा हो गया है और तुम अपने आदमी को अपने अधीन करने के लिए तैयार हो। ध्यान में रखने वाली बात यह है कि हमारी जीभ हमारे मुँह में काफी जगह ले लेती है।इसे जितना बाहर रखा जाये तो मुँह में लंड के लिए उतनी ज्यादा जगह बनेगी और लंड उतना ज्यादा अन्दर लिया जा सकता है।

    लंड चूसने के लिए आसन

    लण्ड चूसने के लिए कुछ सामान्य आसन इस प्रकार हैं। जब थोड़ा सामर्थ्य आ जाये तो अपनी मर्ज़ी से नए नए आसन बना सकते हो।

    1- लड़का खड़ा हो और लड़की घुटने के बल बैठ कर लंड मुँह में ले।

    2- लड़का बिस्तर पर लेटा हो और लड़की उसके पाँव की तरफ बैठी हो और आगे झुक कर लंड मुँह में ले।

    3- लड़का बिस्तर पर लेटा हो और लड़की उसके सीने पर उसकी तरफ पीठ करके बैठी हो।

    4- लड़की बिस्तर पर लेटी हो और लड़का ऊपर से आ कर उसके मुँह को लंड से चोदने की स्थिति में हो।

    5- लड़का लड़की दोनों लेटे हों और दोनों के गुप्तांग परस्पर एक-दूसरे के मुँह के पास हों। (69 अवस्था)

    पहली पहली बार लंड चूसने के लिए बताया गया दूसरा या तीसरा आसन बेहतर रहेगा क्योंकि इसमें लड़की अपनी मर्ज़ी के मुताबिक़ कार्यवाही कर सकती है। पहले और चौथे आसनों में लड़का आक्रामक हो सकता है। अतः इसे थोड़े अभ्यास के बाद और भरोसे वाले लड़के के साथ ही करना चाहिए। पाँचवा आसन तब ग्रहण करना चाहिए जब दोनों परस्पर एक-दूसरे के गुप्तांग चूसना चाहते हों।

    लंड से जान-पहचान

    अगर तुम लंड को पहली बार इतना नज़दीक से देख रही हो या पहली बार छू रही हो तो इसे बेझिझक हाथ में लेकर इसका निरीक्षण करो। उसको हर तरफ से उठा कर और घुमा कर देखो। अगर लंड खता हुआ नहीं है (कई पुरुषों की शिश्न-मुण्ड के ऊपर की त्वचा कटी होती है, इसे ही खता हुआ कहते हैं) तो उसके सुपारे के ऊपर की चमड़ी पीछे खींच कर सुपारे को उघाड़ कर देखो। सुपारे के शीर्ष पर एक छेद होगा जिसमें से वीर्य और पेशाब दोनों निकलते हैं पर एक समय पर सिर्फ एक ही निकल सकता है। जब लंड खड़ा होता है तो पेशाब नहीं निकल सकता और जब शिथिल होता है तो आम तौर पर वीर्य नहीं निकलता।

    लंड का सुपारा सबसे संवेदनशील हिस्सा होता है ख़ास तौर से अगर वह खता हुआ नहीं है तो। खते हुए लंड तुलना में कम संवेदनशील होते हैं। लंड के छड़ की त्वचा मुलायम होती है और सुपारे के मुक़ाबले में कम नाज़ुक होती है। लंड की जड़ के पास दो अंडकोष होते हैं जिनकी त्वचा खुरदुरी होती है और वे पूरी तरह बालों से ढके होते हैं। अंडकोष में वीर्य रहता है और वे ठण्ड में सिकुड़ कर और गर्मी में फैल कर वीर्य को सही तापमान पर रखते हैं। अंडकोष भी बहुत संवेदनशील होते हैं। हालाँकि लंड के मुक़ाबले इनमें स्पर्श-बोध कम होता है लेकिन ज़ोर से दबाने से या चोट लगने से इनमें बहुत दर्द होता है। लंड चूसते समय अंडकोष को भी चूसा जा सकता है लेकिन इनको मुँह में लेते वक़्त सावधानी बरतनी चाहिए।
    चूसने की विधि

    लंड चूसने के लिए उससे प्यार होना ज़रूरी है। अगर लंड को प्यार से देखोगे और उसे प्यार से सहलाओगे तो तुम्हें लंड अच्छा लगने लगेगा। जो चीज़ अच्छी लगती है उसे आसानी से चूमा जा सकता है। चूसने की शुरुआत करने के लिए अपनी पसंद का आसन ग्रहण करके अपने को आरामदेह अवस्था में कर लो। मेरी राय में दूसरा या तीसरा आसन ठीक रहेगा।

    लंड को हाथ में लेकर उसको सहलाने के बाद उसे अपने मुँह के पास ले आओ और उसको नजदीक से देखो तथा उसकी गंध को महसूस करो। तुम्हें यह अच्छा लगेगा। अब उसको अपने होटों से चूमना शुरू करो। लंड की छड़ से शुरू करना ठीक रहेगा और पहले नीचे की तरफ अंडकोष तक छोटी छोटी पुच्चियाँ लेने के बाद ऊपर की तरफ सुपारे तक पुच्चियाँ करो। यह शुरू की पुच्चियाँ सूखी हो सकती हैं। पुच्चियों से पूरा लंड ढकने के बाद जीभ से लंड की छड़ को चाटना शुरू करो। ऐसा करते वक़्त जीभ गीली होनी चाहिए जिससे लंड गीलापन महसूस करे। लंड के छड़ का निचला हिस्सा काफी मार्मिक होता है और जीभ के स्पर्श से लड़के को बहुत उत्तेजना मिलेगी। लंड की छड़ को सब तरफ से अच्छी तरह से चाट-चाट कर गीला कर लो। और फिर उसके सुपारे को अपने होटों के बीच में लेकर उसकी चुम्मी ले लो। ज्यादातर लंड ऐसा करने से अपनी शिथिल अवस्था त्याग कर बढ़ने लगेंगे।

    अब सुपारे को हल्के से होटों से पकड़ लो और जीभ को पैना करके से उसके शीर्ष पर छोटे-छोटे वार करो। चार-पांच बार वार करने के बाद जीभ को सुपारे के चारों ओर घुमाओ। अगर लंड अभी भी शिथिल अवस्था में है तो उसे एक हाथ से पकड़ कर रखो पर अगर वह कड़क हो गया है तो हाथों से पकड़ने की ज़रुरत नहीं है। जब लड़की लंड को केवल मुँह से नियंत्रण में रखती है तो ज्यादा आनंद आता है।

    सुपारे के चारों तरफ तीन-चार बार जीभ घुमाने के बाद लंड को मुँह में लेने का समय आ जाता है। अगर शिथिल है तो लंड को मुँह में लेने में लड़की को आसानी भी होती है और मज़ा भी आता है। मज़ा इसलिए ज्यादा आता है क्योंकि पूरा लंड अन्दर ले पाती हैऔर फिर जब लंड जोश में आता है तो मुँह के अन्दर ही उसकी वृद्धि होती है जो कि लड़की महसूस कर सकती है। लंड की अवस्था के अनुसार उसे जितना मुँह में ले सको ले लो और फिर अपना सिर हिला कर लंड को मुँह से अन्दर-बाहर करो। इससे लड़के को चुदाई का सा मज़ा आएगा।

    जब लंड मुँह में जाने लगे तो जीभ से सुपारे के छेद को छूने से लड़का मतवाला हो जायेगा। बाहर निकालते वक़्त जब सिर्फ सुपारा मुँह में रह जाए तो मुँह को बंद करके उसको जकड़ लो जिससे बाहर न आ सके। इस तरह मुँह से चोदने में लड़के को बहुत मज़ा आएगा और तुम्हें भी अच्छा लगेगा। अगर मुँह थक जाये तो लंड को मुँह से बाहर निकाल कर उसकी छड़ को होटों और जीभ से प्यार कर सकती हो और चाट सकती हो।

    ज्यादातर लड़कों को चुसवाने के समय सूखापन अच्छा नहीं लगता इसलिए लंड को अपने मुँह से गीला रखना चाहिए।

    चूसने में विविधता

    लंड को लॉलीपॉप की तरह भी चूस सकते हैं। इसमें विविधता लाने के लिए और चूसने में और मज़ा लाने के लिए कई तरह के फेर-बदल कर सकते हैं। लंड के सुपारे पर शहद, जैम, आइस क्रीम, या कोई भी ऐसी चीज़ जिसका स्वाद तुम्हें पसंद हो, लगा सकते हैं और फिर उसको चूस सकते हैं। इस से लड़के और लड़की दोनों को मज़ा आ सकता है। लंड चुसवाने में लड़कों का आत्म-नियंत्रण सामान्य सम्भोग के मुकाबले जल्दी ख़त्म हो जाता है क्योंकि इसमें उन्हें ज़्यादा सुख का अनुभव होता है। अतः वे जल्दी ही वीर्य-पात कर देते हैं।

    वीर्य का क्या करें?

    बहुत सी लड़कियों को यह समझ नहीं आता कि वीर्य का क्या किया जाये। जहाँ तक लड़कों का सवाल है वे तो यही चाहते हैं कि जब वे चरमोत्कर्ष पर पहुंचें और अपना लावा लड़की के मुँह में उगलें तो लड़की उस लावे को मुँह में न केवल ग्रहण करे बल्कि ख़ुशी-ख़ुशी उसे पी भी जाये। इस अकेले कार्य से लड़कों को सेक्स की सभी क्रियाओं के मुकाबले में से सबसे ज्यादा ख़ुशी मिलती है। एक तो ख़ुशी इस बात की कि उनका वीर्य लड़की ग्रहण कर रही है और दूसरी बात यह कि वीर्य स्खलन के वक़्त लंड मुँह से निकालने की ज़रुरत नहीं होने से चरमोत्कर्ष के आनंद में कोई बाधा या रुकावट नहीं होती। वे अपना आनंद बिना रोक-टोक के उठा पाते हैं। अगर लड़की वीर्य-पान नहीं करती तो सबसे आनंदमयी मौके पर लड़के को लंड बाहर निकालना पड़ता है और इससे उसके सुख में विराम लग जाता है।

    मेरी राय में तो लड़कियों को वीर्य-पान कर लेना चाहिए। एक तो ऐसा करने से वे अपने प्रेमी के ऊपर बहुत बड़ा उपकार कर देंगी जिसका बदला वे किसी और रूप में निकाल सकती हैं। दूसरे, वीर्य को पीने से इधर-उधर इसका छिड़काव नहीं होगा जिसको बाद में साफ़ नहीं करना पड़ेगा।

    वीर्य को पीने से कोई हानि नहीं है; बल्कि देखा जाये तो इसमें तरह तरह के पौष्टिक पदार्थ प्रोटीन होते हैं। हाँ, इसको पीने के लिए इसके स्वाद को पसंद करने की ज़रुरत होगी जो कि आसानी से विकसित की जा सकती है।

    कहते हैं, हमें खाने में वे ही चीज़ें पसंद आती हैं जो हम बार बार खाते हैं। इसीलिए जो खाना हमें पसंद आता है वह अंग्रेजों को पसंद नहीं आता क्योंकि उन्होंने यह खाना बार बार नहीं खाया होता। बार बार कोई चीज़ खाने से उसके लिए जीभ में स्वाद पैदा हो जाता है और वह हमें अच्छी लगने लगती है। यही बात हमारे संगीत के प्रति रूचि के लिए भी लागू होती है। जो गाने हम बार बार सुन लेते हैं वे अच्छे लगने लगते हैं।

    तो वीर्य के स्वाद को पसंद करने के लिए ज़रूरी है कि इसे बार बार पिया जाये। इसका स्वाद ज्यादातर माँ के दूध की तरह नमकीन सा होता है और इसमें एक अनूठी गंध होती है जो कि कई लड़कियों को कामुक लगती है। हो सकता है पहली बार इसका स्वाद और गंध अच्छा ना लगे पर एक-दो बार के बाद ठीक लगने लगेगा और फिर बाद में तो स्वादिष्ट लगने लगेगा।

    तो लड़कियों को चाहिए कि वीर्य-पान की आदत डालें जिससे उन्हें भी अच्छा लगे और उनके प्रेमी को भी वश में कर सकें। बस एक-दो बार इसका पान करने से झिझक निकल जायेगी और फिर कोई दिक्कत नहीं आएगी। मुझे तो वीर्य-पान में कोई भी नुक़सान नज़र नहीं आता।

    पूरे लंड को निगलना

    (लिंग का गले के अन्दर तक पहुँचाना)

    जब लंड चूसने में थोड़ी महारत हासिल हो जाए तो अगली क्रिया है पूरे लंड को निगलना। इसके लिए जो पहले अभ्यास बताये गए हैं वे करने बहुत ज़रूरी हैं क्योंकि इसमें सफलता हासिल करने के लिए मुँह में लंड के समावेश की क्षमता बढ़ानी होगी। अगर औसत मुँह और औसत लंड के माप देखे जाएँ तो ज्यादातर लड़कियां लंड निगलने में कामयाब हो जाएँगी। ज़रुरत है तो बस दृढ़ निश्चय और आत्मविश्वास की। इसमें लड़कों के सहयोग की बहुत ज़रुरत होगी क्योंकि उन्हें धीरज से काम लेना होगा और अपने ऊपर नियंत्रण रखना होगा। अगर वे जल्दबाजी करेंगे तो लड़की का गला घुट सकता है। इस क्रिया को लड़की की मर्ज़ी के मुताबिक ही करना चाहिए।

    आसन

    इस क्रिया के लिए पहला या चौथा आसन उपयुक्त रहेंगे। शुरू-शुरू में आसन पहला ही बेहतर रहेगा क्योंकि इसमें लड़की पूरी कार्यवाही पर नियंत्रण रख सकती है। जब थोड़ा अनुभव हो जाये तो चौथाआसन इस्तेमाल कर सकते हैं जिसमें लड़का चाहे तो थोड़ा आक्रामक रवैया अपना सकता है।

    विधि

    लड़की को अपना मुँह पूरा खोलना चाहिए और अपनी जीभ चपटी करके जितना बाहर निकाल सकती है, निकाल कर लंड को मुँह में लेना चाहिए। अब धीरे धीरे लंड को जितना ज़्यादा अन्दर ले सकती है लेने की कोशिश करनी चाहिए। लड़का इसमें उसकी मदद कर सकता है। उसे चाहिए कि बिना जोर-जबरदस्ती किये लंड को अन्दर डालने में सहयोग करे। शुरू में लड़की को ऐसा लग सकता है कि उसके लिए पूरा लंड निगलना मुमकिन नहीं है। पर कोशिश करने से सफलता मिल जायेगी यदि लंड बहुत ज़्यादा बड़ा ना हो।

    लंड जितना अन्दर हो सकता है, उतना लेने के बाद उसे बाहर निकाल लो। फिर पिछली बार के मुकाबले थोड़ा और ज़्यादा अन्दर लेने कि कोशिश करो और फिर बाहर निकाल लो। इसी तरह धीरे-धीरे प्रगति करते हुए लंड को पूरा निगल सकते हैं। ध्यान रहे कि सिर्फ मुँह के अन्दर केवल छोटा या शिथिल लंड ही आ सकता है। औसत आकार का उत्तेजित लंड सिर्फ मुँह में नहीं समां सकता। उसे पूरा अन्दर करने के लिए उसे गले में उतारना होगा। शुरू में यह ना-मुमकिन लगता है पर इतना कठिन नहीं है। लेकिन अगर लंड का माप अत्यधिक बड़ा है या फिर लड़की छोटी है तो ज़बरन यह क्रिया नहीं करनी चाहिए। लंड को किस हद तक अन्दर ले सकते हैं, इसका निर्णय लड़की पर छोड़ देना चाहिए। अगर वह सुखद महसूस नहीं कर रही तो रोक देना चाहिए।

    उन्नत तकनीक

    जब इस तरह लंड चूसने में दक्षता हासिल हो जाए और जब इसमें भी कोई तक़लीफ़ ना हो तो अगले चरण की तरफ बढ़ सकते हैं। इसमें लड़का लड़की के मुँह की चुदाई करता है। इसके लिए चौथा या पाँचवा आसन इस्तेमाल कर सकते हैं लेकिन सबसे कारगर चौथा आसन है क्योंकि इसमें लड़का सबसे ज्यादा गहरा प्रवेश पा सकता है और अपने वारों पर नियंत्रण कर सकता है। इस क्रिया में लड़की का कोई नियंत्रण नहीं होता और उसकी भूमिका एक शांत प्राप्तकर्ता की होती है। उसे अपने आदमी की ख़ुशी के लिए उसके वारों को ख़ुशी से झेलना चाहिए। अगर आदमी के वार सहन ना हो सकें तो उसे बता देना चाहिए ताकि वह नियंत्रित हो जाये। लड़कों को चाहिए कि अपनी ख़ुशी के नशे में वे अपने साथी की भावनाओं और ख़ुशी का ध्यान रखे और उसे तकलीफ ना पहुंचाए। उसे यह नहीं भूलना चाहिए की वह लड़की के मुँह को चोद रहा है, उसकी चूत को नहीं।

    निष्कर्ष

    मुझे आशा है इस विधि को इस्तेमाल करके लड़के-लड़कियां एक बहुत ही मज़ेदार और सुखदायक क्रिया का आनंद उठा पाएंगे। लड़कियों को चाहिए की वे लंड से प्यार करना सीख लें और लड़कों को चाहिए कि अपने लिंग को साफ़ रखें और लड़की की इच्छाओं का सम्मान करें।

    सबको लंड चूसने और चुसवाने की शुभ-कामनाएं

  • Argument

    Argument wins the situation but looses the person.
    So never argue with your loved ones.
    Because situation is not important than your loved ones.
    Kumar

  • Love Survives

    Love Survives

    Time to share is always there

    I peered thru life
    Ever avoiding strife
    But now am undone
    My barriers broken
    For one has found me

    Reached in and unbound me

    Her love has burst my bonds
    And set music to my songs
    Her need for me
    And mine for she
    Has made my Winter Spring

    A new start
    With hammering heart
    We color the world with our dream
    Nothing is as it did seem
    The darkness of my solitude is done
    She - my rising sun.
    Kumar

  • कई लोग सोचते होंगे कि श

    कई लोग सोचते होंगे कि शायद यहाँ पर मनगढ़ंत कहानियाँ होती हैं लेकिन दोस्तो, यह कलयुग है, घोर कलयुग ! इन सभी किस्सों में सचाई सौ परसेंट होती है।

    अब अंतर्वासना के पाठकों को वंदना की गीली चूत का प्रणाम !

    मैं एक तेतीस साल की ज़िन्दगी को जी लेने वाली सोच की मालिक हूँ। मुझे जिंदगी अपने ढंग से मस्ती के साथ जीना अच्छा लगता है। मैं एक पढ़ी-लिखी महिला हूँ, तेतीस साल की

    जिंदगी में अब तक मैं बहुत से लौड़े ले चुकी हूँ।

    सोलह साल की थी जब मैंने अपनी सील तुड़वाई थी और फिर उसके बाद कई लड़के कॉलेज लाइफ तक आये और मेरे साथ मजे करके गए। मैं खुद भी कभी किसी लड़के के साथ सीरियस नहीं रही थी।

    अब मैं एक सरकारी स्कूल में कंप्यूटर की वोकेशनल स्कीम के तहत कंप्यूटर लेक्चरर हूँ, वो भी सिर्फ लड़कों के स्कूल में ! वैसे तो वहाँ मेरे अपने कुछ ख़ास सहयोगियों के साथ स्कूल से बाहर अवैध संबंध हैं। मैं अपने पति से अलग रहती हूँ, मेरी दो बेटियाँ हैं जो अपने पापा के साथ दादा-दादी के घर में ही रहती हैं। अकेलेपन ने मुझे और गाड़ दिया था, पतिदेव ने मुझे समझाने के बजाये छोड़ ही दिया जिससे मैं और अय्याश होने लगी हूँ। बत्तीस हज़ार मेरी तनख्वाह है, अकेली रहती हूँ, हर सुख-सुविधा घर में मौजूद है। पति के अलग होने के बाद मैं और बिगड़ चुकी हूँ और अपने साथियों को रात-रात भर अपने घर रखती हूँ।

    आज मैं आपके सामने अपनी एक सबसे अच्छी चुदाई के बारे लिखने लगी हूँ ज़रा गौर फरमाना !

    मुझे गहरे-खुले गले के सूट पहनना पसंद है और वो भी छातियों से कसे हुए, पीठ पर जिप, कमर से कसे, पटियाला सलवार !

    जून-जुलाई की बात है, सब जानते हैं पंजाब में कितनी गर्मी पड़ती है इन दिनों ! स्कूल बंद थे लेकिन आजकल हमारे महकमे में एजुसेट एजूकेशन ऑनलाइन क्लास लगती है, उसके तहत पांच दिन का सेमीनार लगा। बाकी सारा स्कूल बंद था। साइंस ग्रुप में सिर्फ पांच लड़के हैं। गर्मी बहुत थी पहले ही जालीदार मुलायम सा सूट डाला था बाकी पसीने से मेरा सूट बदन से चिपक जाता !

    पांच में से तीन लड़के सिरे के हरामी हैं, उनकी नज़र तो मेरी चूचियों पर टिकी रहती, बस मेरे जिस्म को देख देख अन्दर ही आहें भरते होंगे !

    पहला दिन ऐसे निकला, दूसरे दिन मैंने और पतला सूट पहना और खुल कर अपने गले की नुमाईश लगाई। मुझे शुरु से ही इस तरीके से लड़कों को अपना जिस्म दिखाना अच्छा लगता था। इससे मुझे बहुत गर्मी मिलती थी। वो आज मुझे देख देखते ही रह गए। गर्मी की वजह से मैं आज कंप्यूटर लैब में बैठ गई, ए.सी लैब थी। मैंने उनको छुट्टी कर दी और खुद लैब में चली गई। दरवाज़ा थोडा बंद कर मैंने अन्तर्वासना की साईट खोल ली साथ में ही एक और अडल्ट वेबसाइट ! वहाँ कहानियाँ पढ़ते-पढ़ते मेरी चूत गीली हो गई और मम्मे तन गए। देखते और पढ़ते हुए मेरा हाथ मेरी सलवार में घुस गया। मैंने अपना नाड़ा थोड़ा डीला कर लिया और अपनी चूत में ऊँगली करने लगी। दरवाज़े को कोई कुण्डी नहीं लगाईं थी क्यूंकि स्कूल में सिर्फ मैं ही थी इसलिए कुण्डी नहीं लगाईं थी।

    पर्स से सी.डी निकाल कर लगाई और देखने लगी। अब मैं आराम से मेज पर आधी लेट गई और अपना कमीज़ उठाकर मम्मे दबाने लगी। मुझे क्या मालूम था कि मैं तो सिर्फ कंप्यूटर पर मूवी देख रही हूँ, तो कोई और मेरी लाइव मूवी देख रहा है। तभी किसी का हाथ मेरे कंधे पर आन टिका। मैं घबरा गई, मेरा रंग उड़ने लगा।

    वो तीनों हरामी लड़के मेरे पीछे खड़े थे।

    तुम यहाँ क्या कर रहे हो ?

    मैडम ! आप इस वक्त यहाँ क्या कर रही हो ?

    शट- अप एंड गेट लोस्ट फ्रॉम माय लैब !

    वो बोले- मैडम, लैब सरकारी है आपकी नहीं ! हमें तो कुछ प्रिंट्स निकालने थे। क्या पता था कि कुछ और दिख जाएगा !

    उनसे बातें करते हुए अपनी सलवार और कुर्ती वहीं रहने दी। तभी विवेक नाम का लड़का घूम मेरे सामने आया और मेरी जांघों पर हाथ फेरता हुआ बोला- क्या जांघें हैं यार !

    उसका स्पर्श पाते ही मैं बहकने लगी, नकली डांट लगाने लगी।

    राहुल ने अपना हाथ मेरी कुर्ती में डालते हुए मेरे चूचूक मसल दिए और पंकज ने मेरा हाथ पकड़ा और अपनी जिप खोल अन्दर घुसा दिया। उसका लिंग हाथ में पकड़ कर ही मैंने अब बेशर्म होने का फैंसला लिया। एक दम से मेरे में बदलाव देख वो थोड़ा चौंके।

    मादरचोद कमीनो, हरामियो ! कुण्डी तो लगा लो !

    भोंसड़ी वालो ! एक जना जाकर स्कूल के मेन-गेट को लॉक करके आओ !

    तीनों ने मुझे छोड़ा और मेरे बताये सारे काम करने निकल गए। मैंने अब मूवी की आवाज़ भी तेज़ कर दी और सलवार उतार पास में पड़ी कुर्सी पर फेंक दी, फिर कमीज़ भी उतार कर फेंक दी। पर्स से कोल्ड क्रीम निकाली, उसको चूत पर लगाया और गांड में भी लिपस्टिक लगाई।

    जब वो आये, मैं सिर्फ ब्रा-पैंटी में मेज़ पर लेटी थी। तीनों ने मेरे इशारे पर अपनी अपनी पैंट उतार डाली और शर्ट भी। तीनों को ऊँगली के इशारे से पास बुलाया और ब्रा खोलते हुए बारी-बारी तीनों के कच्छे उतार दिए।

    हरामियों के क्या लौड़े थे- सोचा नहीं था कि बारहवीं क्लास के लड़कों के इतने बड़े लौड़े होंगे। एक एक कर तीनों के चूसने लगी। राहुल और पंकज के एक साथ मुँह में डलवाए और विवेक मेरी पैंटी उतार मेरी शेव्ड चूत चाटने लगा। उसके चाटने से मेरा दाना और फड़कने लगा, चूचूक तन गए।

    पंकज ने झट से मुँह में चूचूक लेकर चूसना शुरु किया। राहुल ने भी दूसरा चूचूक मुँह में लेकर काट सा दिया- हरामी ! ज़रा प्यार से चूस ! बहुत कोमल हैं !

    बोला- साली कुतिया कहीं की ! मैडम, साली बहन की लौड़ी ! रांड कहीं की !

    उसने लौड़ा मेरे हलक में उतार दिया, मैं खांसने लगी। बोले- चल कुतिया तेरा रेप करते हैं !

    विवेक ने मेरी गांड पर थप्पड़ जड़ दिए, मेरे बाल नौचकर मेरे हलक में लौड़ा उतार दिया।

    पागल हो गए हो कुत्तो !

    हाँ !

    बुरी तरह से मेरी छाती पर दांतों के निशान गाड़ डाले। विवेक ने मेरी चूत में डाल दिया, पंकज और राहुल मेरा मुँह चोदने लगे, साथ में मेरे चूचूक रगड़ने लगे।

    अहऽऽ उहऽऽ !

    उसका मोटा लौड़ा मेरी चूत चीर रहा था- ले साली कुतिया ! बहुत सुना था तेरे बारे में तेरे मोहल्ले से ! वाकई में तू बहुत प्यासी और चुदासी औरत है !

    हाँ कमीनो ! हूँ मैं रांड ! क्या करूँ ? मेरे खसम का खड़ा न होवे ! हाय और मार बेहन चोद मेरी ! विवेक जोर लगा दे सारा !

    उसने साथ में अपनी दो उंगलियों को मेरी गांड में घुसा दिया और कोल्ड क्रीम लगाते लगाते ४ उंगलियों को घुसा दिया ।

    चूत से निकाल एक पल में गांड में डाल दिया- चीरता हुआ लौड़ा घुसने लगा- मेरी फटने लगी !

    उसने वैसे ही उठाया और नीचे कारपेट पर मुझे ले गया। खुद सीधा लेट गया, मैं उसकी तरफ पिछवाड़ा करके उसके लौड़े पर बैठती गई और लौड़ा अन्दर जाता रहा। वो वॉलीबाल की तरह उछल रहा था कि पंकज ने मेरी चूत पर अपने होंठ रख दिए। राहुल ने मुँह में डाल रखा था।

    हाय कमीनी अब बोल के दिखा- बहुत बकती है साली क्लास में !

    सही में मैं कुतिया बन चुकी थी, मैं खांसने लगती तब वो निकालता। लेकिन पंकज के होंठों की मेरी चूत पर हो रही करामात मेरी सारी तकलीफ ख़तम कर देती। विवेक गांड मारता जा रहा था कि पंकज खड़ा हुआ और आगे से आकर विवेक की जांघों पर बैठ गया और अपना आठ इंच का लौड़ा चूत पे रगड़ने लगा।

    हाय हाय डाल दे तू भी साले !

    उसने अपना मोटा लौड़ा चूत में घुसाना शुरु किया तब विवेक रुक गया। लेकिन जैसे ही उसका पूरा घुस गया, दोनों हवाई जहाज की स्पीड पर मेरी ठुकाई करने लगे। मुँह से सिसकियाँ फ़ूट रही थी- हाय ! चोदो मुझे !

    राहुल ने फिर से मुँह में डाल दिया और हो गया शुरु !

    पंकज तेज़ होता गया, विवेक उससे भी ज्यादा तेज़ हो गया तो पंकज रुक गया। विवेक ने पंकज को हटा दिया और एकदम से मुझे पलट कर नीचे किया और तेजी से चोदने लगा।

    अह उह करता करता उसने अपना सारा माल मेरी गांड में छोड़ना शुरु किया- सारी खुजली ख़त्म !

    अब पंकज सीधा लेट गया और मेरी गांड में डाल दिया, राहुल ने पंकज की तरह मेरी चूत में घुसा दिया। विवेक का लौड़ा मेरी गीली गाण्ड से भर कर निकला था दोनों के रस से लथपथ मैंने मुँह में डाल सारा चाट लिया, एक बून्द भी नहीं जाने दी मैंने !

    विवेक पास में लेट हांफने लगा। पंकज ने भी वैसे ही रफ़्तार खींची, राहुल को उतार दिया और घोड़ी बना के गांड में डाल फिर चूत में डालते हुए रफ़्तार पकड़ी। राहुल ने मुँह में ठूंस दिया। दोनों हाथों से नीचे से भैंस के थनों की तरह लटक रहे कसे हुए मम्मों को पकड़ कर झटके दिए। एक भैंस की तरह मानो मेरा दूध चो रहा हो ! ज़बरदस्त तरीके से पकड़ रखे थे उसने और पीछे दन दना दन झटके मारते हुए उसने एक दम से मेरे घुटनों को खिसकाते मुझे कारपेट पर गिरा दिया लेकिन लौड़ा बाहर नहीं आने दिया। मेरे मम्मे कारपेट से रगड़ खाने लगे। थोड़ी चुभन होने लगी। लौड़ा भी कस गया लेकिन वो नहीं रुका।

    दोनों एक साथ झड़े। उसने सारा माल मेरी बच्चेदानी के मुँह के पास निकाल दिया। न जाने कितने वक्त के बाद मैंने किसी को बिना कंडोम चूत में छूटने का मौका दिया। एक साथ दोनों का कम जब मिला- मैंने आंखें मूँद ली और उसके साथ चिपक गई ! फिर अलग हुए तो उसने मुँह में डाल कर साफ़ करवाया। राहुल उठा और मुझे फिर से पटक कर मेरे ऊपर सवार हो गया। सबमें से राहुल का लौड़ा सबसे लम्बा मोटा और फाड़ू था। उसने बेहतरीन तरीके से मेरी चूत मारी, झड़ने का नाम नहीं ले रहा था। इतने में विवेक का फिर खड़ा हो चुका था।

    लेकिन राहुल क्या चोदू था- उसने मुझे फिर से झाड़ दिया और गांड में डाल दिया और सारा लावा वहीं छोड़ दिया।

    विवेक का तन चुका था, पंकज तैयार था।

    पूरा दिन स्कूल की लैब में ए.सी के सामने तीनों ने न जाने कितनी बार मुझे रौंदा !

    घड़ी देखी तो शाम के साढ़े पांच बज चुके थे और छः बजे चौकीदार स्कूल में आता था। उसको सब मालूम था मेरे बारे में, क्यूंकि एक दो बार मेरे साथी टीचर ने उसके कमरे में मुझे चोदा था। लेकिन वो तीनों नहीं चाहते थे कि चौकीदार उन्हें देखे !

    हम निकल रहे थे, मैंने अपनी स्कूटी स्टार्ट की ही थी कि चौकीदार ने उन्हें निकलते देख लिया। मेरी स्कूटी बंद हो गई, सेल्फ ख़राब था। मैंने उसको कहा- स्टार्ट कर दो किक से !

    बोला- मैडम मेरे लौड़े को कब मौका दोगी आप ? आज फिर से लड़कों से ठुकवा बैठी हो ! मैं कौन सा कम हूँ ? माना पोस्ट चौकीदार की है लेकिन कौन सा काला कलूटा हूँ ? पूरा मजा दूंगा ! किक मारते मारते यह सब बोल रहा था। उसने एक दम से अपना लौड़ा निकाला और बोला- देखो इसको ! अभी सोया हुआ है फिर भी कितना मोटा है ! जब आपका हाथ लगेगा तो दहाड़ेगा यह !

    सही में उस जैसा लौड़ा आज तक नहीं देखा था। वो था भी खुद छः फुट तीन इंच लम्बा-चौड़ा मर्द था, सुडौल मजबूत शरीर का मालिक था।

    स्कूटी स्टार्ट हुई- मैडम जवाब देती जाओ ?

    मैंने गौगल्ज़ लगाते हुए कहा- रात ग्यारह बजे मेरे घर आ जाना ! इंतज़ार करुँगी !

    वो खुश हो गया

  • आपको एक खास बात बताऊं !

    जब मैं कुवांरी थी तब मेरी चुदने की इच्छा कम होती थी। क्यूंकि मुझे इस बारे में अधिक नहीं मालूम था। आज मेरी शादी हुये लगभग पांच साल हो चुके हैं, मैं बेशर्मी की हदें पार करके सभी तरीको से अपने पति से चुदवा चुकी हूँ।

    जी हां ! बिल्कुल अनजान बन कर ! भोली बन कर ! और मासूम बन कर ... ! जैसे कि मैं सेक्स के बारे में कुछ नहीं जानती हूं। यही भोलापन, मासूमियत उनके लण्ड को खड़ा कर चोदने पर मजबूर कर देती थी। आप ही बताईये, लड़कियां जब भोली बन कर, अनजान बनकर और मासूम सा चेहरा लेकर लण्ड लेती हैं तब पति को लगता है कि मेरी बीवी सती सावित्री है ...

    पर वो क्या जाने, हम लोग भोली बनकर ऐसे ऐसे मोटे मोटे और लम्बे लण्ड डकार जाती हैं कि उनके फ़रिश्तों तक को पता नहीं चल पाता है।

    पर अब बड़ी मुश्किल आन पड़ी है। वो छ्ह माह के लिये कनाडा चले गये हैं ... मुझे यहां अकेली तड़पने के लिये। पर हां ! यह उनका उपकार है कि मेरी देखभाल करने के लिये उन्होंने अपने दोस्त के बेटे दीपू को कह दिया था कि वह मेरा ख्याल रखे।

    जानते हैं आप, उसने कैसा ख्याल रखा ... मुझे चोद चोद कर बेहाल कर दिया ... नए नए तरीकों से ! मुझे खूब चोदा ...

    क्या हुआ था आप जानना चाहेंगे ना ...

    मेरे पति के कनाडा जाने के बाद रात को दीपू खाना खा कर मेरे यहां सोने के लिये आ जाता था।

    गर्मी के दिन थे ... मैं अधिकतर छत पर ही अकेली सोती थी। कारण यह था कि रात को अक्सर मेरी वासना करवटें लेने लगती थी। बदन आग हो जाता था। मैं अपना जिस्म उघाड़ कर छत पर बेचैनी के कारण मछली की तरह छटपटाने लग जाती थी। पेटीकोट ऊपर उठा कर चूत को नंगी कर लेती थी, ब्लाऊज उतार फ़ेंकती थी। ठण्डी हवा के मस्त झोंके मेरे बदन को सहलाते थे। पर बदन था कि उसमें शोले और भड़क उठते थे। मुठ मार मार कर मैं लोट लगाती थी ... फिर जब मेरे शरीर से काम-रस बाहर आ जाता था तब चैन मिलता था।

    आज भी आकाश में हल्के बादल थे। हवा चल रही थी ... मेरे जिस्म को गुदगुदा रही थी। एक तरावट सी जिस्म में भर रही थी। मन था कि उड़ा जा रहा था। उसी मस्त समां में मेरी आंख लग गई और मैं सो गई। अचानक ऐसा लगा कि मेरे शरीर पर पानी की ठण्डी बूंदे पड़ रही हैं। मेरी आंख खुल गई। हवा बन्द थी और बरसात का सा मौसम हो रहा था। तभी टप टप पानी गिरने लगा। मुझे तेज सिरहन सी हुई। मेरा बदन भीगने लगा। जैसे तन जल उठा।

    बरसात तेज होती गई ... बादल गरजने लगे ... बिजली तड़पने लगी ... मैंने आग में जैसे जलते हुये अपना पेटीकोट ऊंचा कर लिया, अपना ब्लाऊज सामने से खोल लिया। बदन जैसे आग में लिपट गया ...

    मैंने अपने स्तन भींच लिये ... और सिसकियाँ भरने लगी। मैं भीगे बिस्तर पर लोट लगाने लगी। अपनी चूत बिस्तर पर रगड़ने लगी। इस बात से अनजान कि कोई मेरे पास खड़ा हुआ ये सब देख रहा है।

    "रीता भाभी ... बरसात तेज है ... नीचे चलो !"

    मेरे कान जैसे सुन्न थे, वो बार बार आवाज लगा रहा था।

    जैसे ही मेरी तन्द्रा टूटी ... मैं एकाएक घबरा गई।

    "दीपू ... तू कब आया ऊपर ... " मैंने नशे में कहा।

    "राम कसम भाभी मैंने कुछ नहीं देखा ... नीचे चलो" दीपू शरम से लाल हो रहा था।

    "क्या नहीं देखा दीपू ... चुपचाप खड़ा होकर देखता रहा और कहता है कुछ नहीं देखा" मेरी चोरी पकड़ी गई थी। उसके लण्ड का उठान पजामें में से साफ़ नजर आ रहा था। अपने आप ही जैसे वह मेरी चूत मांग रहा हो। मैंने उसका हाथ पकड़ कर उसे अपनी ओर खींच लिया और उसे दबोच लिया ... कुछ ही पलों में वो मुझे चोद रहा था। अचानक मैं जैसे जाल में उलझती चली गई। मुझे जैसे किसी ने मछली की तरह से जाल में फ़ंसा लिया था, मैं तड़प उठी ... तभी एक झटके में मेरी नींद खुल गई।

    मेरा सुहाना सपना टूट गया था। मेरी मच्छरदानी पानी के कारण मेरे ऊपर गिरउ गई थी। दीपू उसे खींच कर एक तरफ़ कर रहा था। मेरा बदन वास्तव में आधा नंगा था। जिसे दीपू बड़े ही चाव से निहार रहा था।

    "भाभी ... पूरी भीग गई हो ... नीचे चलो ... " उसकी ललचाई आंखे मेरे अर्धनग्न शरीर में गड़ी जा रही थी। मुझ पर तो जैसे चुदाई का नशा सवार था। मैंने भीगे ब्लाऊज ठीक करने की कोशिश की ... पर वो शरीर से जैसे चिपक गया था।

    "दीपू जरा मदद कर ... मेरा ब्लाऊज ठीक कर दे !"

    दीपू मेरे पास बैठ गया और ब्लाऊज के बटन सामने से लगाने लगा ... उसकी अंगुलियाँ मेरे गुदाज स्तनों को बार बार छू कर जैसे आग लगा रही थी। उसके पजामे में उसका खड़ा लण्ड जैसे मुझे निमंत्रण दे रहा था।

    "भाभी , बटन नहीं लग रहा है ... "

    "ओह ... कोशिश तो कर ना ... "

    वह फिर मेरे ब्लाऊज के बहाने स्तनों को दबाने लगा ... जाने कब उसने मेरे ब्लाऊज को पूरा ही खोल दिया और चूंचियां सहलाने लगा। मेरी आंखे फिर से नशे में बंद हो गई। मेरा जिस्म तड़प उठा। उसने धीरे से मेरा हाथ लेकर अपने लण्ड पर रख दिया। मैंने लण्ड को थाम लिया और मेरी मुठ्ठी कसने लगी।

    बरसात की फ़ुहारें तेज होने लगी। दीपू सिसक उठा। मैंने उसके भीगे बदन को देखा और जैसे मैं उस काम देवता को देख कर पिघलने लगी। चूत ने रस की दो बूंदें बाहर निकाल दी। चूंचियां का मर्दन वो बड़े प्यार से कर रहा था। मेरे चुचूक भी दो अंगुलियों के बीच में सिसकी भर रहे थे। मेरी चूत का दाना फ़ूलने लगा था। अचानक उसका हाथ मेरी चूत पर आ गया और दाने पर उसकी रगड़ लग गई।

    मैं हाय करती हुई गीले बिस्तर पर लुढ़क गई। मेरे चेहरे पर सीधी बारिश की तेज बूंदे आ रही थी। गीला बिस्तर छप छप की आवाज करने लगा था।

    "रीता भाभी ... आप का जिस्म कितना गरम है ... " उसकी सांसे तेज हो गई थी।

    "दीपू ... आह , तू कितना अच्छा है रे ... " उसके हाथ मुझे गजब की गर्मी दे रहे थे।

    "भाभी ... मुझे कुछ करने दो ... " उसका अनुनय विनय भरा स्वर सुनाई दिया।

    " कर ले, सब कर ले मेरे दीपू ... कुछ क्यों ... आजा मेरे ऊपर आ जा ... हाय, मेरी जान निकाल दे ... "

    मेरी बुदबुदाहट उसके कानो में जैसे अमृत बन कर कर उतर गई। वो जैसे आसमान बन कर मेरे ऊपर छा गया ... नीचे से धरती का बिस्तर मिल गया ... मेरा बदन उसके भार से दब गया ... मैं सिसकियाँ भरने लगी। कैसा मधुर अनुभव था यह ... तेज वर्षा की फ़ुहारों में मेरा यह पहला अनुभव ... मेरी चूत फ़ड़क उठी, चूत के दोनों लब पानी से भीगे हुये थे ... तिस पर चूत का गरम पानी ... बदन जैसे आग में पिघलता हुआ, तभी ... एक मूसलनुमा लौड़ा मेरी चूत में उतरता सा लगा। वो दीपू का मस्त लण्ड था जो मेरे चूत के लबों को चूमता हुआ ... अन्दर घुस गया था।

    मेरी टांगे स्वतः ही फ़ैल गई ... चौड़ा गई ... लण्ड देवता का गीली चूत ने भव्य स्वागत किया, अपनी चूत के चिकने पानी से उसे नहला दिया। दीपू लाईन क्लीअर मान कर मेरे से लिपट पड़ा और चुम्मा चाटी करने लगा ... मैं अपनी आंखें बंद करके और अपना मुख खोल कर जोर जोर से सांस ले रही थी ... जैसे हांफ़ रही थी। मेरी चूंचियां दब उठी और लण्ड मेरी चूत की अंधेरी गहराईयों में अंधों की तरह घुसता चला गया। लगा कि जैसे मेरी चूत फ़ाड़ देगा। अन्दर शायद मेरी बच्चेदानी से टकरा गया। मुझे हल्का सा दर्द जैसा हुआ। दूसरे ही क्षण जैसे दूसरा मूसल घुस पड़ा ... मेरी तो जैसे हाय जान निकली जा रही थी ... सीत्कार पर सीत्कार निकली जा रही थी। मैं धमाधम चुदी जा रही थी ... दीपू को शायद बहुत दिनों के बाद कोई चूत मिली थी, सो वो पूरी तन्मयता से मन लगा कर मुझे चोद रहा था। बारिश की तेज बूंदें जैसे मेरी तन को और जहरीला बना रही थी।

    दीपू मेरे तन पर फ़िसला जा रहा था। मेरा गीला बदन ... और उसका भीगा काम देवता सा मोहक रूप ... गीली चूत ... गीला लण्ड ... मैं मस्तानी हो कर लण्ड ले रही थी। मेरे

    शरीर से अब जैसे शोले निकलने लगे थे ... मैंने उसके चूतड़ों को कस लिया और उसे कहा,"दीपू ... नीचे आ जाओ ... अब मुझे भी चोदने दो !"

    "पर रीता भाभी, चुदोगी तो आप ही ना ... " दीपू वर्षा का आनन्द लेता हुआ बोला।

    "अरे, चल ना, नीचे आ जा ... " मैं थोड़ा सा मचली तो वो धीरे से मुझे लिपटा कर पलट गया। अब मेरी बारी थी, मैंने चूत को लण्ड पर जोर दे कर दबाया। उसका मूसल नुमा लण्ड इस बार मेरी चूत की दीवारों पर रगड़ मारता हुआ सीधा जड़ तक आ गया। मेरे लटकते हुये स्तन उसके हाथ में मसले जा रहे थे। दीपू की एक अंगुली मेरे चूतड़ों की दरार में घुस पड़ी और छेद को बींधती हुई गाण्ड में उतर गई।

    मैं उसके ऊपर लेट गई और अपनी चूत को धीरे धीरे ऊपर नीचे रगड़ कर चुदने लगी। बारिश की मोटी मोटी बूंदें मेरी पीठ पर गिर रही थी। मैंने अपना चेहरा उसकी गर्दन के पास घुसा लिया और आंखें बन्द करके चुदाई का मजा लेने लगी। हम दोनों जोर जोर से एक दूसरे की चूत और लण्ड घिस रहे थे ... मेरे आनन्द की सीमा टूटती जा रही थी। मेरा शरीर वासना भरी कसक से लहरा उठा था। मुझे लग रहा था कि मेरी रसीली चूत अब लपलपाने लगी थी। मेरी चूत में लहरें उठने लगी थी। फिर भी हम दोनों बुरी तरह से लिपटे हुये थे। मेरी चूत लण्ड पर पूरी तरह से जोर लगा रही थी ... बस ... कितना आनन्द लेती, मेरी चूत पानी छोड़ने लिये लहरा उठी और अन्ततः मेरी चूत ने पानी पानी छोड़ दिया ... और मैं झड़ने लगी। मैं दीपू पर अपना शरीर लहरा कर अपना रज निकाल रही थी।

    मैं अब उससे अलग हो कर एक तरफ़ लुढ़क गई। दीपू उठ कर बैठ गया और अपने लण्ड को दबा कर मुठ मारने लगा ... एक दो मुठ में ही उसके लण्ड ने वीर्य छोड़ दिया और बरसात की मूसलाधार पानी के साथ मिल कहीं घुल गया। हम दोनों बैठे बैठे ही गले मिलने लगे ... मुझे अब पानी की बौछारों से ठण्ड लगने लगी थी। मैं उठ कर नीचे भागी। दीपू भी मेरे पीछे कपड़े ले कर नीचे आ गया।

    मैं अपना भीगा बदन तौलिये से पोंछने लगी, पर दीपू मुझे छोड़ता भला। उसने गीले कपड़े एक तरफ़ रख दिये और भाग कर मेरे पीछे चिपक गया।

    "भाभी मत पोंछो, गीली ही बहुत सेक्सी लग रही हो !"

    "सुन रे दीपू, तूने अपनी भाभी को तो चोद ही दिया है , अब सो जा, मुझे भी सोने दे !"

    "नहीं रीता भाभी ... मेरे लण्ड पर तो तरस खाओ ... देखो ना आपके चूतड़ देख कर कैसा कड़क हो रहा है ... प्लीज ... बस एक बार ... अपनी गाण्ड का मजा दे दो ... मरवा लो
    प्लीज ... "

    "हाय ऐसा ना बोल दीपू ... सच मेरी गाण्ड को लण्ड के मजे देगा ... ?" मुझे उसका ये प्रेमभाव बहुत भाया और मैंने उसके लण्ड पर अपनी कोमल और नरम पोन्द दबा दिये। उसका फिर से लण्ड तन्ना उठा।

    " भाभी मेरा लण्ड चूसोगी ... बस एक बार ... फिर मैं भी आपकी भोसड़ी को चूस कर अपको मजा दूंगा !"

    "हाय मेरे राजा ... तू तो मेरा काम देवता है ... "मैंने अपने चूतड़ों में से उसका लण्ड बाहर निकाल लिया और नीचे झुकती चली गई। उसका लण्ड आगे से मोटा नहीं था पर पतला था, उसका सुपाड़ा भी छोटा पर तीखा सा था, पर ऊपर की ओर उसका डण्डा बहुत ही मोटा था। सच में किसी मूली या मूसल जैसा था। मैंने मुठ मारते हुये उसे अपने मुख में समा लिया और कस कस कर चूमने लगी। मुझे भी लग रहा था कि अब दीपू भी मेरी भोसड़ी को चूस कर मेरा रस निकाले। मैंने जैसे ही उसका लण्ड चूसते हुये ऊपर देखा तो एक बार में ही वो समझ गया। उसने मुझे बिस्तर पर लेटा दिया और मेरी चूत पर उसके होंठ जम गये। उसकी लपलपाती हुई जीभ मेरी चूत के भीतरी भागों को सहला रही थी। जीभ की रगड़ से मेरा दाना भी कड़ा हो गया था। मैं सुख से सराबोर हो रही थी। तभी दीपू ने तकिया लेकर कहा कि अपनी चूतड़ के नीचे ये रख लो और गाण्ड का छेद ऊपर कर लो।

    पर मैंने जल्दी से करवट बदली और उल्टी हो गई और अपनी चूत को तकिये पर जमा दी। मैंने अपनी दोनों टांगे फ़ैला कर अपना फ़ूल सा भूरा गुलाब खिला कर लण्ड़ को हाज़िर कर दिया। उसका मूसल जैसा लण्ड चिकनाई की तरावट लिये हुये मेरे गुलाब जैसे नरम छेद पर दब गया। मैंने पीछे घूम कर उसे मुस्करा कर देखा। दूसरे ही क्षण लण्ड मेरी गाण्ड पर घुसने के लिये जोर लगा रहा था। मैंने अपनी गाण्ड को ढीला छोड़ा और लण्ड का स्वागत किया। वो धीरे धीरे प्यार से अंधेरी गुफ़ा में रास्ता ढूंढता हुआ ... आगे बढ़ चला। मेरी गाण्ड तरावट से भर उठी। मीठी मीठी सी गुदगुदी और मूसल जैसा लण्ड, पति से गाण्ड मराने से मुझे इस लण्ड में अधिक मजा आ रहा था। उसके धक्के अब बढ़ने लगे थे। मेरी गाण्ड चुदने लगी थी।

    मैं उसे और गहराई में घुसाने का प्रयत्न कर रही थी। मेरे चूतड़ ऊपर जोर लगाने लगे थे। दीपू ने मौका देखा और थोड़ा सा जोर लगा कर एक झटके में लण्ड को पूरा बैठा दिया। मैं दर्द से तड़प उठी।

    "साला लण्ड है या लोहे की रॉड ... चल अब गाड़ी तेज चला ... "

    वो मेरी पीठ पर लेट गया। उसके हाथ मेरे शरीर पर चूंचियाँ दबाने के लिये अन्दर घुस पड़े ... मैंने जैसे मन ही मन दीपू को धन्यवाद दिया। दोनों बोबे दबा कर उसकी कमर मेरी गाण्ड पर उछलने कूदने लगी। मैं खुशी के मारे आनन्द की किलकारियाँ मारने लगी। सिसकी फ़ूट पड़ी ... । उसके सेक्सी शरीर का स्पर्श मुझे निहाल कर रहा था। मेरी चूंचियाँ दबा दबा कर उसने लाल कर दी थी। उसका लण्ड मेरी गाण्ड की भरपूर चुदाई कर रहा था। मेरी चूत भी चूने लग गई थी। उसमें से भी पानी रिसने लगा था। मेरी गाण्ड में मनोहारी गुदगुदी उठ रही थी, अब तो मेरी चूत में भी मीठी सी सुरसराहट होने लग गई थी। मेरी चूत लण्ड की प्यासी होने लगी। हाय ... कितना अच्छा होता कि अब ये लण्ड मेरी चूत की प्यास बुझाता ... मैंने गाण्ड मराते हुये घूम कर दीपू को आंख से इशारा किया।

    "आह्ह नहीं रीता भाभी ... तंग गाण्ड का मजा ही जोर का है ... पानी निकालने दो प्लीज !"

    "हाय रे फिर कभी गाण्ड चोद लेना, अभी तो मेरी चूत मार दे दीपू !"

    "तो ये ले भोसड़ी की ... हाय भाभी सॉरी ... गाली मुँह से निकल ही गई !"

    "नहीं रे चुदाते समय सब कुछ भला सा लगता है ... " फिर मेरे मुख से सीत्कार निकल पड़ी। उसने अपना लण्ड मेरी चूत में जोर से घुसेड़ दिया था ... बस लण्ड का स्पर्श जैसे ही चूत को मिला ... मेरी चूत फ़ड़क उठी। लड़कियों की चूत में लण्ड घुसा और वो सीधे स्वर्ग का आनन्द लेने लगती है। मेरी चूत की कसावट बढ़ने लगी ... वो मेरे पीठ पर सवार हो कर चूत चोद रहा था। उसने मुझे घोड़ी बनने को कहा ... शायद लण्ड को अन्दर पेलने में तकलीफ़ हो रही थी। मेरी गाण्ड ऊंची होते ही उसका लण्ड चूत में यूं घुस गया जैसे कि किसी बड़े छेद में बिना किसी तकलीफ़ सीधे सट से मोम में घुस गया हो। मेरी चूत बहुत गीली हो गई थी। किसी बड़े भोसड़े की तरह चुद रही थी ... उसने मेरे स्तन एक बार फिर से पकड़ते हुये अपनी ओर दबा लिये। मुझे चुचूकों को दबाने से और चूत में मूसल की रगड़ से मस्ती आने लगी। उसका लण्ड मेरी चूत को तेजी से झटके मार मार कर चोद रहा था। अचानक उसका चोदने का तरीका बदल गया। करारे शॉट पड़ने लगे। मेरी चूत मे तेज आनन्द दायक खुजली उठने लगी। लगा कि चूत पानी छोड़ देगी।

    "मां ... मेरी ... दीईईईपूऊऊऊ चोद मार रे ... निकाल दे फ़ुद्दी का पानी ... हाय राम जीऽऽऽऽ ... मेरी तो निकल गई राजा ... आह्ह्ह्ह" और मैंने अपना पानी छोड़ दिया ...

    उसका हाथ स्तनों पर से खींच कर हटाने लगी ...

    "बस छोड़ दे अब ... मत कर जल रही है ... " पर उसे कहाँ होश था ... मैं दर्द के मारे चीख उठी और दीपू ... उसका माल छूट गया ... उसकी चीख ने मेरी चीख का साथ दिया ...

    उसका लण्ड बाहर निकल आया और अपना वीर्य बिस्तर पर गिराने लगा। कुछ देर तक यूं ही माल निकलने का सिलसिला चलता रहा। फिर उस बिस्तर से उठे और हम दोनों दूसरे बिस्तर पर नंगे ही जाकर लेट गये ... और फिर जाने कब हम दोनों ही सो गये।

    मुझे लगा कि कोई मुझे बुरी तरह झकझोर रहा है ... मेरी आंख खुल गई ... सवेरा हो चुका था ... पर ये दीपू ... मेरी चूत में अपना लण्ड घुसाने का प्रयत्न कर रहा था ... मुझे हंसी आ गई ... मैंने अपने दोनों टांगें पसार दी और उसका लण्ड अपनी चूत में समेट लिया। उसे अपने से कस कर सुला लिया। मैं सुबह सवेरे फिर से चुद रही थी ... मुझे अपनी सुहागरात की याद दिला रही थी ... सोना नहीं ... बस चुदती रहो ... सुबह चुदाई, दिन को चुदाई रात को तो पूछो मत ... शरीर की मां चुद जाती थी ... हाय मैंने ये क्या कह दिया .

  • बच गई मेरी नौकरी

    मैं किरण, तीस वर्ष की एक नर्स हूँ, सरकारी अस्पताल में काम करती हूँ। स्टाफ़ की कमी के कारण मुझे काफ़ी काम देखना पड़ता था। इन दिनों मेरी नाईट-शिफ़्ट चल रही थी। अचानक ही कोई वार्ड के बाहर दिखा। कोई जवान लड़का था। उसने अपना सामान दरवाजे के बाहर ही रख दिया। मैंने उसे घूर कर देखा- यह कौन सामान के साथ होस्पिटल में आ गया?

    मैं तुरन्त गई और पूछा,"आप कौन हैं? .... इतना सामान....?"

    "जी....मैं....राज.... मैं यहाँ ट्रान्सफ़र पर आया हूँ.... कम्पाऊंडर हूँ...."

    "ओह....आईये....मेरा नाम किरण है !" सामान एक तरफ़ रखवा कर मैंने उसे बताया कि ऑफ़िस में जाकर अपनी ड्यूटी जोईन कर ले और पता लगा ले कि ड्यूटी कहाँ है।

    राज कुछ ही देर में वापस आ गया। उसे मेरे ही सेक्शन में लगाया था। उसका सामान रेस्ट रूम में रखवा दिया। मेरा जूनियर था.... नया था शायद पहली बार इस शहर में आया होगा.... उसके रहने का कोई ठिकाना नहीं था.... कुछ सोच कर मैंने उसे क्वार्टर मिलने तक मैंने अपने क्वार्टर में रहने को कह दिया। मैं अभी कुछ ही दूर किराये के मकान में रहती थी और पहली तारीख से अस्पताल के क्वार्टर में शिफ़्ट करना था। उसे मैं सामने ही होटल में खाने के ले गई.... मेरे पास अपना टिफ़िन था।

    बातचीत में पता चला कि वो पास ही गांव का था। कुछ ही देर में हम दोनों घुल मिल गये थे। राज बहुत हंसमुख था। छोटी मोटी बातों का बुरा नहीं मानता था। मेरे से वो लगभग छ: वर्ष छोटा था। पर चूंकि गांव से था इसलिये उसका शरीर भी गठा हुआ और रफ़ भी था। पर पहली ही नजर में मुझे वो अच्छा लगने लगा था। वो भी मुझसे मिलकर बहुत खुश था। उसे मेरा जिस्म और फ़िगर को बार बार निहारने में अच्छा लग रहा था, बिलकुल वैसे ही जैसे कि एक साधारण लड़का लड़की के अंगो को निहारता है।

    राज को मेरे साथ ही काम करना था। उसकी और मेरी ड्यूटी साथ ही लगती थी। आज मैंने उसे एक दिन आराम करने का मौका दिया और अगले दिन से उसे भी नाईट ड्यूटी पर आना था। कुछ ही दिनों में हम दोनों में अच्छी बनने लग गई थी। मेरी मुस्कान उसे बहुत अच्छी लगती थी। बार बार वो यही कहता था कि आप हमेशा मुस्कुराते रहिये....अच्छी लगती हैं।

    कुछ ही दिनों में मेरी नजरें भी बदलने लग गई। वो मुझे सेक्सी लगने लगा। उसमे मुझे मर्द नजर आने लगा था। मेरी नजरें रह रह उसके कभी लण्ड पर जाती और कभी उसके सुडौल चूतड़ों पर जाती। मेरी मन की भावनाएँ मैली होने लगी। मुझे लगाता कि काश....मैं उससे चुदवा पाती....। ऐसा नहीं था कि मेरे पति मेरा ख्याल नहीं रखते थे....मैं उनके साथ बहुत खुश थी। मेरा एक लड़का भी था....पर शायद मुझे नया माल....नया लण्ड मिलने की चाह थी। राज भी मेरे अन्दाज़ को भांप गया था। उसकी शादी नहीं हुई थी.... उसे भी शायद किसी लड़की को चोदने की इच्छा हो रही होगी। मैं मजाक में कभी कभी आजकल उसके चूतड़ो पर हाथ भी मार देती थी। वो सिहर उठता था।

    आज मैं राज के साथ कुछ कर गुजरने की नीयत से ही आई थी....मैं ना तो अन्दर पेन्टी पहनी थी और ना ही ब्लाऊज के भीतर ब्रा....। इससे मेरे अंगों की थिरकन अधिक नजर आ रही थी। हम नेत्र-विभाग में थे .... वैसे भी इन दिनों मरीज बहुत ही कम थे....डाक्टर भी नौ बजे राऊन्ड ले कर हिदायतें दे कर चला गया था। मरीज हॉल में कम ही थे....हम दोनों उन्हें चेक कर के बैठ गये थे....

    लगभग सभी मरीज सोने की तैयारी कर रहे थे। राज बार बार मेरे आगे पीछे चक्कर लगा रहा था। शायद मौके की तलाश में था। मैंने जानबूझ कर उठ कर पास वाले चादर और कम्बल वाले कमरे में चादर लेने गई। राज भी पीछे पीछे आ गया,"मैं आपकी कुछ मदद कर दूँ....?"

    "हाँ....राज मैं स्टूल पर चढ़ रही हूँ ....देखना स्टूल डगमगाये ना....!" मैंने अपनी शरारत शुरू कर दी.... उसे पटाना तो था ही....मैं सोच रही थी कि उस पर गिरने का बहाना करके उससे लिपट जाऊंगी.... पर चोर तो उसके दिल में भी था.... पहल उसने ही कर दी.... एक हाथ उसने मेरे चूतड़ पर रख दिया.... और एक हाथ कमर पर.... उसके हाथ लगाते ही बिना पेन्टी के मेरे चूतड़ मुझे नंगे से लगे। मुझे लगा कि मेरे नंगे चूतड़ ही उसने पकड़ लिये हों। मुझे कंपकंपी सी दौड़ गई। मैंने अपने होंठ भींच लिये। मुँह से आह निकलते निकलते रह गई।

    "अरे....स्टूल पकड़ो....ये क्या पकड़ रखा है....?" मैंने अपने चूतड़ों को मटकाया। उसने मुझे हल्का सा खींच कर अपने ऊपर गिरा लिया। मैं कटी पतंग की तरह उसकी गोदी में आ गिरी....।
    "कैसा रहा ये झटका....?" वो शरारत से बोला....

    "क्या करता है राज....कोई देख लेगा ना....चल उतार मुझे...." मैंने मुस्करा कर कहा, उसने जानकर अपने चेहरे को मेरे चेहरे से जोश में आ कर भींच लिया।

    "हाय किरण जी....क्या जालिम मुस्कान है आपकी....!" मुझे आंख मारते हुए मेरे चूतड़ो को दबा दिया और नीचे उतार दिया।

    "क्या करते हो ऐसे.... चलो हटो सामने से...." मैंने उसे धक्का दिया....पर उसने मेरा हाथ पकड़ कर मेरे साथ ही वो कम्बलों के ऊपर गिर पड़ा और मुझे दबा दिया। उसने गिरते ही उसने मेरे होंठों को अपने अपने होंठ से भींच लिया और उसके दोनों हाथ मेरे स्तनों पर आ गये। मैं आनन्द से भर उठी। वासना के मारे मैंने अपने होंठ दांतो से काट लिये। मैंने अपने पांव खोल कर कोशिश की कि उसका लण्ड मेरी चूत पर रगड़ मार दे। वो भी इधर उधर हो कर यही कोशिश कर कर रहा था। कुछ ही पलों में मेरी फूली हुई चूत उसके लण्ड से टकरा गई और ऊपर से उसने अपने लण्ड का जोर मेरी चूत पर डाल दिया। मैं भी अपनी चूत को ऊपर उभार कर उसके लण्ड से रगड़ खाने में सहायता करने लगी।

    "छोड़ दो ना अब.... हाय....क्या कर रहे हो.... !!"

    "प्लीज....करने दो ना....नीचे आपकी नरम नरम कितनी अच्छी लग रग रही है....!"

    मैं पसीने में नहा उठी। मेरा अंग अंग वासना से जलने लगा....वो भी एक कुत्ते की तरह से अपनी कमर हिला हिला कर मेरी चूत पर अपने लण्ड को घिस रहा था। मेरी चूत में आग भड़क उठी थी। लण्ड लेने को मेरी चूत बेताब होने लगी। मैं चूत का और जोर लगाने लगी.... हाय रे.... कैसी मदहोशी है.... चूत गीली और चिकनी हो चुकी थी। मेरे दोनों स्तन उसके हाथों से बुरी तरह मसले जा रहे थे। ब्रा नहीं होने के कारण चूंचिया बाहर निकल पड़ी थी। चूचुक कड़े हो चुके थे....

    अचानक बाहर किसी की आहट आई। राज उछल कर खड़ा हो गया और एक चादर मेरे पर खींच कर डाल दी। मैं आंखे बन्द किये हांफ़ती रही। अपने आपको संयत करने लगी। मैंने चादर अलग करके अपने को ठीक किया। अपनी ड्रेस को सम्हाल कर मैंने बाहर झांका। राज किसी दूसरी नर्स से बात कर रहा था। कुछ ही देर में वो नर्स चली गई। मुझे फिर से लगने लगा कि राज मेरे साथ फिर से वही करे....

    जल्दी ही मौका मिल गया। रात की एक बज रहा था। सभी गहरी नींद में सो चुके थे। राज मुझे चोदने के इरादे से रेस्ट रूम में ले आया। जहां डॉक्टर चाय नाश्ता और रेस्ट वगैरह करते हैं। कमरे में आते ही उसने मेरे दोनों चूचक दबा दिये और कुछ देर मसलता ही रहा। आहें भर भर के मैं मसलवाती रही। मैं उसके चेहरे को प्यार से निहारती रही। अपने स्तनों को और उभार के उसके हाथो में भरने लगी। उसने अचानक ही अपना एक हाथ मेरी चूत पर रख दिया और दबाने लग गया। मेरे मुख से आह निकल पड़ी।

    "राज... बस कर .... ऐसे नहीं....हाय रे....!" पर उसने चूत पर हाथ जमा लिये थे.... मेरी चूत को तरह तरह से सहलाने व दबाने लगा। मैं आनन्द के मारे दोहरी हो गई, तड़प उठी....हाय रे ये मेरी चूत में अपना लण्ड क्यों नहीं पेल दे रहा है.... मैंने भी अब सारी शरम छोड़ कर उसका लण्ड पकड़ लिया।

    " राज .... ये पकड़ लूं....?"

    "पकड़ ले....पर फिर तू चुद जायेगी ...." उसके मुँह से चुदना शब्द सुन कर मैंने भी होश खो दिये....

    "राज .... क्या कहा? चोदेगा?....राम रे.... और बोल न.... तेरा लण्ड मस्त है रे.... सोलिड है...." मैंने पूरा जोर लगा कर उसके लण्ड को मरोड़ दिया.... वो सिसक उठा। मैंने उसे लगभग खींचते हुए कहा...." राज.... बस अब.... आह .... देर किस बात की है....मां री.... राज.... आजा....ऽऽऽ"
    राज ने दरवाजे को पांव से धक्का दे कर बन्द कर किया और उसने अपनी पैन्ट खोल दी। उसका कड़कता हुआ लण्ड बाहर निकल कर सीधा तन गया। मैंने अपनी साड़ी उतार फ़ेंकी और ब्लाऊज भी उतार दिया और हाथ फ़ैला कर उसे बाहों में आने का न्योता दिया। मेरी चूत पर बड़ी और काली झांटे चूत की शोभा बढ़ा रही थी....मेरा नंगा जिस्म देख कर वो अपना होश खो रहा था।

    वो धीरे से मेरे पास आ गया और मैंने उसका नंगा लण्ड अपने हाथ में थाम लिया। उसके लण्ड के ऊपर की काली चमकदार झांटे काफ़ी बड़ी थी। गांव का लण्ड.... मोटा.... खुरदरा .... बलिष्ठ....और मेरी शहर की नरम कोमल चूत....मैंने उसके लण्ड की चमड़ी उपर करके उसका चमकदार लाल सुपाड़ा निकाल लिया। उसकी झांटों के बाल मुझे खीचने में मजा आ रहा था.... मुझे लगा कि लण्ड कुछ ज्यादा ही मोटा है.... पर मैं तो चुदने के लिये बेताब हो रही थी।

    मेरी कुलबुलाहट बढती जा रही थी। उसने मुझे बिस्तर पर लेटा दिया। मेरी टांगें स्वत: ही ऊपर उठ गई। राज मेरी दोनों टांगों के बीच में सेट हो चुका था। उसका चमचमाता लाल सुपाड़ा मुझे सैर पर ले जाने के लिये बैचेन हो रहा था। इन्तज़ार की घड़िया समाप्त हुईं.... सुपाड़ा चूत के द्वार पर दस्तक दे रहा था.... मेरी आंखे नशे में बन्द होती जा रही थी। मेरी झांटे को पकड़ कर उसने अपने लण्ड को मेरी चूत में दबा दिया। थोड़े से जोर लगाने के बाद उसका लण्ड मेरी चूत में सरसराता हुआ प्रवेश कर गया। गीली चूत ने उसका स्वागत किया और अपने में लण्ड को समेटते गई।

    दोनों खुश थे....यानि मैं और राज और दूसरी ओर लण्ड और चूत....। लण्ड चूत की गहराईयों में डूबता चला गया.... मैं सिसकारी भरती हुई लण्ड को अपने भीतर समाने लगी। मेरे बोबे तन गये.... लण्ड जड़ तक उतर चुका था। उसके हाथ मेरे बोबे पर कसते चले गये.... उसका खुरदरा और मोटा लण्ड देसी चुदाई का मजा दे रहा था। मेरी चूत ने उसके लण्ड को लपेट लिया था और जैसे उसका पूरा स्वाद ले रही थी। बाहर निकलता हुआ लण्ड मुझे अपने अन्दर एक खालीपन का अहसास कराने लगा था पर दूसरे ही क्षण उसका अन्दर घुसना मुझे तड़पा गया। मेरी चूत एक मिठास से भर गई।

    उसकी रफ़्तार बढ़ने लगी....चूत में मिठास का अहसास ज्यादा आने लगा। मेरा बांध टूटने लगा था। अब मैं भी अपनी चूत को जोर जोर से उछालने लगी थी। वासना का नशा....चुदाई की मिठास.... लण्ड का जड़ तक चुदाई करना....मुझे स्वर्ग की सैर करा रहा था। पति की चुदाई से ये बिल्कुल अलग थी।

    चोरी से चुदाई.... देसी लण्ड.... और पराया मर्द....ये सब नशा डबल कर रहे थे। चुदाई की रफ़्तार तेज हो चुकी थी.... मैं उन्मुक्त भाव से चुदा रही थी। .... चरमसीमा के नज़दीक आती जा रही थी। शहर की बाला देसी लण्ड कब तक झेल पाती.... मेरा पूरा शरीर चुदाई की मिठास से परिपूर्ण हो रहा था.... बदन तड़क रहा था....कसक रहा था.... मेरा जिस्म जैसे सबकुछ बाहर निकालने को तड़प उठा........

    "अं ऽअऽअऽऽ ह्ह्ह्ह्ह्.... राज्........हऽऽऽय .... चुद गई....ऐईईईइऽऽऽऽऽऽ....म- ेरा निकला रीऽऽऽ .... माई रीऽऽऽऽ .... जोर से मार रे.... फ़ाड़ दे मेरी....राऽऽऽज...." और मैं अब सिमटने लगी.... मेरे जिस्म ने मेरा साथ छोड़ दिया और लगा कि मेरा सबकुछ चूत के रास्ते बाहर आ जायेगा....मैं जोर से झड़ने लगी.... राज समझ गया था। वो धीरे धीरे चोदने लगा था। मुझे झड़ने में मेरी सहायता कर रहा था।

    "किरण.... मेरी मदद करो प्लीज.... ऐसे ही रहो....!"

    मैंने अपने पांव ऊपर ही रखे....गांव का देसी लण्ड था , इतनी जल्दी हार मानने वाला नहीं था। अचानक मैं दर्द से छटपटा उठी। उसका ताकतवर लन्ड मेरी चूतड़ो को चीरता हुआ मेरी गाण्ड में घुस चुका था।

    "नहीं.... नहीं राज....मैं मर जाऊंगी....!"

    उसने मेरी एक नहीं सुनी....और जोर लगा कर और अन्दर घुसेड़ता चला गया....
    "बस किरण.... हो गया.... करने दे....प्लीज...."

    "मेरी गाण्ड फ़ट जायेगी राज.... मान जा.... छोड़ दे नाऽऽऽ"

    अब उसके लण्ड ने मेरी गाण्ड पर पूरा कब्जा कर लिया था। उसने धक्के बढ़ा दिये.... मैं झड़ भी चुकी थी....इसलिये ज्यादा तकलीफ़ हो रही थी। उसने मेरे बोबे फिर से खींचने चालू कर दिये। मेरी चूंचियाँ जलने लगी थी। लग रहा था जैसे मेरी गाण्ड में किसी ने गरम लोहे की सलाख डाल दी हो.... पर जल्दी ही दर्द कम होने लगा.... मेरी सहनशक्ति काम कर गई थी। अब मैं उसके लण्ड को झेल सकती थी। मैं फिर से गरम होने लगी थी। उसकी गाण्ड चोदने की रफ़्तार बढ चली थी।

    "मैं मर गया....किरण.... मै....मैं........गया ....हाय...." उसने अपना लण्ड गाण्ड से बाहर खींच लिया। अचानक ही गाण्ड में खालीपन लगने लगा। मैं उसका लण्ड पकड़ कर जोर से दबा कर मुठ मारने लगी.... उसके लण्ड में एक लहर उठी और मैंने तुरन्त ही लण्ड को अपने मुख में प्यार से ले लिया। एक तीखी धार मेरे मुख में निकल पड़ी....फिर एक के बाद एक लगातार पिचकारी....फ़ुहारें....- मेरे मुख में भरने लगी....मैंने सारा वीर्य स्वाद ले ले कर पी लिया....और अब उसके लण्ड को मुँह से खींच खींच कर सारा दूध निकाल रही थी। कुछ ही देर में वो मेरे पास पड़ा गहरी सांसे ले रहा था। मैंने भी अपने आप को संयत किया और उठ कर बैठ गई। राज भी उठ कर बैठ गया था।

    जैसे ही हमारी नजर सामने उठी .... हम दोनों के होश उड़ गये.... सामने मेट्रन खड़ी थी.... मेरी तो हालत बिगड़ गई। हम दोनों भोंचक्के से मेट्रन को देखने लगे.... राज तुरन्त उठा....और नंगा ही डर के मारे मेट्रन के पैरों पर गिर पड़ा,"मेम....प्लीज हमे माफ़ कर दो...." राज गिड़गिड़ाने लगा।

    मेरी तो रुलाई फ़ूट पड़ी ....चुदाई के चक्कर में पकड़े गये। नौकरी कैसे जाती है....सामने नजर आ रहा था....

    "अब दोनों चुप हो जाओ....आगे से ध्यान रखो....दरवाजे की कुन्डी लगाना मत भूलो ! ....समझे? ....अब राज जरा मेरे कपड़े भी उतार दो....और किरण तुम बाहर ध्यान रखना....कि कहीं कोई आ ना जाये....!"

    मैं भाग कर मेट्रन से लिपट पड़ी....और उनके पांव पर गिर सी गई.... और माफ़ी मांगने लगी.... मेट्रन पचास वर्ष की होगी...थोड़े से बाल सफ़ेद भी थे....पर उसका मन कठोर नहीं था....
    "पगली....मैं भी तो इन्सान हूँ.... तुम्हारी तरह मुझे भी तो लण्ड चाहिये....जाओ खेलो, और जिन्दगी की मस्तियाँ लो...." और अपने कपड़े उतार कर मेरी जगह लेट गई। राज उसके बगल में लेट चुका था। मैंने अपनी ड्रेस पहनी और कमरे से बाहर आकर स्टूल लगा कर बैठ गई.... अन्दर वासनायुक्त सिसकारियाँ गूंजने लगी थी ....शायद मेट्रन की चुदाई चालू हो चुकी थी। मेरी धड़कन अब सामान्य होने लगी थी। मुझे लगा कि बस.... ऊपर वाले ने हमारी नौकरी बचा ली थी। मेट्रन अन्दर चुद रही थी....और हम बच गये थे....वर्ना ये चुदाई तो हम दोनों को मार जाती।

  • चेहरे पर एक सेक्सी सी म

    मेरे पड़ोस में आभा आण्टी रहती है। उन्हें कम उम्र में ही डायबिटीज हो गई थी। उदर सम्बन्धी अन्य शिकायतें भी थी। प्रायः सभी पाठकगण भी जानते हैं कि प्राणायाम और अन्य सरल आसनों से हम सब ये ठीक कर सकते हैं। जी हां खाने पर थोड़ा कन्ट्रोल तो करना ही पड़ता है। आभा आण्टी ने मुझे योग द्वारा उपचार करने को कहा, जिसे मैंने सहर्ष स्वीकार कर लिया। मेरी आभा आण्टी में खास रुचि भी थी, क्योंकि आरम्भ से ही मैं उन्हें अपने विचारों में चोदने की कोशिश करता था और मुठ मार कर वीर्य निकाल देता था। उनका हुस्न मुझे भाता है, खास करके उनके चूतड़ बहुत ही टाईट और उत्तेजक लगते हैं। उनके चेहरे पर एक सेक्सी सी मुस्कान हमेशा रहती है। मुझे नहीं पता था कि आभा मेरे बारे में क्या सोचती थी।

    मैंने आभा को बताया कि सवेरे पांच बजे का समय उत्तम रहता है, मुझे पता था कि उसका पति यानि अंकल जी रात को देर से आते हैं और सवेरे सात बजे पहले नहीं उठते। गर्मी का मौसम था सो हम तीसरी मंजिल की छत पर चले आये।

    उन्हें हल्के कपड़े पहनने थे, जिसमें उसका बदन बहुत सेक्सी लगता था। एक हल्का पजामा और और एक हल्का टॉप.... । पहले एक सप्ताह के प्रायाणाम से डायबिटीज पर अच्छा असर हुआ....। अब मैंने उन्हें कुछ आसन भी करवाने आरम्भ कर दिये और मैं उसके जिस्म के कटाव और उभारों को मन में बसा लेता था।

    मेरे मन में अब उसे भोगने का लालच बढ़ता गया। फ़लस्वरूप मैं अब उसके जिस्म को भी छूने लगा था। अभ्यास के दौरान मैं उसके प्यारे से गोल गोल कसे हुये स्तनों को छू लेता था.... उसकी पीठ पर हाथ फ़ेर कर उसे उत्तेजित करने का प्रयत्न करता था। उसके जिस्म की कंपकंपाहट मुझे भी महसूस होती थी। पर उसने कभी भी इसका विरोध नहीं किया। एक बार सर्वांग आसन कराते समय मैंने उसके चूतड़ों को भी सहलाया और दबाया भी। उसके चूत का गीलापन भी मुझे दिखाई दे जाता था.... सो मुझे ये पता चल गया था कि अब वो उत्तेजित हो जाती है और शायद गीलापन उसकी चुदने की चाहत की निशानी थी।

    यही सोच मेरे मस्तिष्क में थी। मेरी एक बार कोशिश करने की इच्छा प्रबल हो उठी। मैंने सर्वांग आसन के दौरान उसकी चूत जो गीली थी, उसे सहला दिया....

    उसने अपने पांव नीचे कर लिये और शरमा गई।

    "आकाश जी, यह आप क्या कर रहे थे...."

    "सॉरी आभा, आपकी ये मुझे इतनी अच्छी लगी कि मैंने उसे छू लिया.... गीली भी थी ना !" मैंने हिम्मत करके उसे उकसाया।

    "गीली.... आप तो मस्ती करने लगे.... उससे हो गई होगी....!" अब उसकी नजर भी मेरे उठे हुये लण्ड पर थी। उसका इशारा भी उसी ओर था। मैंने उसकी बांह थामते हुये उसके नजदीक आने की कोशिश की, पर वो समझ गई थी।

    "अब योग समाप्त करते हैं और नीचे चलते हैं!" कह कर वह सीढ़ियों पर आ गई। मुझे तनिक निराशा सा हुई। मैं भी उसके पीछे पीछे सीढ़ियों पर आ गया। यहां से बाहर नहीं नजर आता था। मैंने मौका देख कर उसे अपने बाहों में लपेट लिया।

    थोड़ी सी ना नुकुर के बाद उसने कोई विरोध नहीं किया। बस उसकी बाहें मेरी कमर से लिपट गई। उसके तने हुये स्तन मेरी छाती से रगड़ खाने लगे। मेरे जिस्म में सनसनाहट होने लगी, लण्ड फ़डफ़डा गया, खड़ा हो कर नीचे ठोकरें मारने लगा और कुछ ढूंढने लगा। उसकी चूत का दबाव भी मेरे लण्ड पर बढ़ गया और वो धीरे धीरे ऊपर नीचे उसे मेरे लण्ड पर घिसने लगी। आभा के मुख से सिसकारियाँ निकलने लगी। उसके कांपते होंठ मेरी ओर उठ गये.... मैंने झुक कर धीरे से उसके होंठ पर अपने होंठ रख दिये और अधरों का रसपान करते हुये हमारे बदन एक दूसरे को रगड़ने लगे। दोनों के जिस्मों में वासना का उफ़ान भर गया था। लण्ड और चूत एक दूसरे में घुसने की पुरजोर कोशिश कर रहे थे। मेरे हाथ उसके स्तनों को बेदर्दी से मसल रहे थे, उसकी निपल को घुमा कर खींच रहे थे। उसका हाथ मेरे लण्ड पर आ गया। उसने मुझे धक्का दे कर दीवार से लगा दिया और जैसे बेतहाशा लिपट गई।

    "आ....आ.... आभा जी.... अब पजामा नीचे कर लो....अपनी मुनिया के दर्शन तो करा दो ....लण्ड....तो कड़क...."

    उसने मेरे होंठों पर अंगुली रख दी और लण्ड पर मुठ मारने लग़ी। मैंने भी उसकी चूत दबा दी। हमें असीम आनन्द आने लगा था। एक दूसरे को हम बुरी तरह से दबा रहे थे। उसकी चूत जैसे लण्ड निगल लेना चाहती थी। दोनों की रगड़ जबरदस्त थी। दोनों के मुख से सिसकारी निकल पड़ी और गंगा जमुना हमारे अंगों से फ़ूट पड़ी। दोनों ही सिसकारियां भरते हुये अपना यौवन रस छोड़ चुके थे। आभा का पजामा नीचे से भीग उठा था और मेरे नीले पजामे में भी एक काला सा गीला धब्बा उभर आया था। मुझे अपने पांव पर अपना वीर्य बहता सा लगा। हम दोनों का जोश ठण्डा हो चुका था। आभा के चहरे पर शरम की झलक उभर आई थी। उसकी नजरें नीचे झुक गई थी। उसने मुस्काते हुये अपना चेहरा दोनों हाथों से छुपा लिया।

    फिर मुझे तिरछी नजरों से देखती हुई सीढ़ियां उतर कर चली गई। आज तो उसने मुझे चाय को भी नहीं पूछा.... मैंने भी अपना सर झटका और तेजी से सीढ़ियां उतरता हुआ अपने घर आ गया।

    दिन भर इस घटना को याद करके मुझ में उत्तेजना भरती रही.... इतनी सी देर में जाने क्या से क्या हो गया। आभा को चोदने की ललक मुझमें बढ़ने लगी। इतना कुछ होने के बाद चुदाई में देरी क्यूं करूं.... सब कुछ तो खुल चुका था। सारा दिन जैसे एक साल की तरह निकला। सवेरे होते ही हम दोनों एक बार फिर तीसरी मंजिल की छत पर थे। आभा को मैंने पहले पूरा योग कराया फिर हल्का व्यायाम कराया। इस बीच उसने कोई भी ऐसा संकेत नहीं दिया कि बीते हुये दिन हम दोनों के बीच क्या हुआ था। बातों में भी ये नहीं लगा कि जैसे कल कुछ हुआ था। पर मैंने कल की तरह आज भी सीढ़ियों के समीप उसे जा दबोचा। उसके मम्मे धीरे धीरे खूब सहलाये। उसने भी मेरा लण्ड खूब दबाया और मसला। अन्त में हम दोनों एक दूसरे के अंगों में अपने लण्ड और चूत को रगड़ते हुये झड़ गये। वह शरमा कर फिर भाग गई।

    मुझे तो अब उसे चोदने की लग रही थी, पर शायद उसे लग रहा थी कि उसके लिये इतना ही बहुत था। मैंने दबी जबान से उससे पूछा भी था, तो उसका जवाब था कि जब अपन दोनों को इसमें ही इतना मजा आता है तो चोदना क्या जरूरी है। उसकी इच्छा के विरुद्ध तो मैं वैसे भी कुछ नहीं करना नहीं चाहता था। पर हां उसने आज उसने मुझे चाय नाश्ता कराया था। पर मैंने आज एक करामात दिखा थी। उसने गलती से अपना पजामा वहीं डाल दिया था। मैंने तुरन्त एक ब्लेड से पजामे मे उसकी चूत के स्थान पर तीन चार टांके काट दिये। मेरा ये तरीका काम दे गया।

    सवेरे योगाभ्यास कराने के बाद हम दोनों सीढ़ियों के पास फिर से लिपटे हुये थे। मैं उसके स्तनो को प्यार से सहला और दबा रहा था। वह भी आज खुल कर खेल रही थी। मेरे लण्ड को बाहर निकाल कर मुठ मार रही थी और मेरे गोल गोल कड़े और बंधे हुये चूतड़ों को दबा रही थी। उसका पजामा चूत के पास से गीला हो चुका था। उसने मेरा नंगा लण्ड हाथ से पकड़ कर अपनी चूत पर रगड़ना चालू कर दिया। मैंने भी उसे लिपटा लिया। उसके पजामे के ऊपर से लण्ड का सुपाड़ा रगड़ खा कर लाल हो गया था। अचानक ही उस कटे हुये पजामे में मेरा लण्ड घुस गया।

    आभा के लण्ड को चूत में रगड़ने से लण्ड उसकी चूत के अन्दर रगड़ खा कर बाहर आ जाता था। पर इस बार लण्ड जैसे ही चूत के द्वार पर लगा, मैंने उसका हाथ छुड़ा कर अलग कर दिया और लण्ड चूत में उतरता चला गया। जैसे उसके मुख से एक मस्ती की किलकारी निकल पड़ी। उसकी चूत ने जोर लगा कर मेरा पूरा लण्ड अपनी गहराईयों में समेट लिया। मुझे एक नरम सा, गरम सा चूत की दीवारों का मधुर सा घर्षण महसूस हुआ। उसने मुझे दीवार के पास टिका दिया और अपना पूरा जोर मेरे लण्ड पर लगा दिया। उसका धक्का मुझे बहुत प्यारा लगा। अब वह मेरे चेहरे के पास अपना सर झुका कर नीचे धक्के पर धक्का मारने लगी। मेरे कूल्हे भी हिल हिल कर उसकी सहायता कर रहे थे। वहां एक मधुर सा सुहावना एवं मस्ती भरा समां सा बंध गया था। दोनों की मधुर सिसकारियां सीढ़ियों पर गूंजने लग गई थी। आभा अब अपनी शरम छोड़ चुकी थी। चुदते चुदते भी आगे की चुदाई का प्रोग्राम बना रही थी।

    "आप तो मेरे गुरू हो ना.... सवेरे दस बजे इनके जाने के बाद मुझे कमरे ही जम के चोदना.... वहां मजा आयेगा !"

    "बस कुछ मत कहो मेरी आभा.... आपको चोदने में मस्त मजा आ रहा है। "

    हम दोनों चुदाई की चरमसीमा पर पहुंच चुके थे और दोनों के कलपुर्जे किसी इंजन की भांति तेजी से चल रहे थे.... कितना ही बचने की कोशिश करो.... एक सीमा के बाद आंखों के आगे मस्ती के सितारे चमक उठते हैं.... और झर झर करके रति-रस छलक पड़ता है। आभा ने मेरे लण्ड पर जोर लगाया और उसकी चूत लपलपा उठी। लहरें उठने लगी.... और चूत का गीलापन बढ़ गया.... तभी मेरे लण्ड ने भी बाहर आ कर अपनी फ़ुहारे छोड़ दी.... हम दोनों एक दूसरे से लिपट पड़े। दोनों की बाहें कस गई। काम रस चूत के द्वार से पांव के सहारे नीचे बह चला। मैं आभा के गालों और होंठो को चाटने लगा। उसके मुझे झटके दे कर दूर किया।

    "आपके लण्ड में जोर है .... देखो तो मेरा पजामा फ़ाड कर चूत में घुस गया !" आभा ने शरमाते हुये कहा।

    "नहीं आभाजी, मुझे तो आप को चोदना था इसलिये मैंने कल आपके पजामे के तीन-चार टांके ब्लेड से काट दिये थे !"

    "क्याऽऽऽऽऽऽऽ? शरारती कहीं के.... मैं तो खुद ही आज आपसे चुदवा लेती.... पर इस तरीके से मुझे अधिक मजा आया.... सुनिये ! मेरी एक सहेली है मिनी, उसे भी ये योगा सिखा दो ना.... बस योगा ही...."

    "जरूर , पर देखो सीखना तो पूरा ही होगा .... ये इफ़ और बट नही चलेगा !"

    "नहीं तुम सिर्फ़ मुझे ही चोदोगे.... वर्ना सब केन्सल....!"

    "यह तो ठीक नहीं है .... प्लीज.... देखो ये सुन कर मेरा लण्ड तो खड़ा होने लगा है !"

    "यदि आपने ये सब किया तो फिर चोद लेना मुझे ?.... बड़े आये लण्ड वाले !"

    आभा की सहेली मिनी बहुत ही सेक्सी थी, कैसे उसने मुझे बुला कर अपनी अदम्य-वासना तृप्त की.... उसने आभा से छुप कर मेरे साथ क्या क्या किया । ये सब अगले भाग में ..

  • Hi dear frinds , Jarur se padhna

    मेरा नाम मिथ्स (मिथिलेश ) है ! मैं नागपुर में रहता हूँ ! आप लोगो को मेरी कहानी बताता हूँ ! एक दिन मैं अपने दोस्त वरुण के यहाँ गया ! उसके घर में कोई भी नहीं था ! मैंने आवाज़ लगाई पर किसी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी ! मैं अन्दर चला गया तो उसके कमरे की तरफ जाते हुए मुझे बाथरूम से आवाज़ आई ! मुझे लगा शायद वो नहा रहा होगा ! मुझे मजाक सूझा ! मैंने दरवाज़े को खोला तो अन्दर से चिल्लाने की आवाज़ आई ! मैंने देखा तो एकदम से आश्चर्य में पड़ गया ! अन्दर उसकी बहन नहा रही थी ! उसका नाम लवी था ! उसका पूरा बदन पानी से गीला था ! उसको नंगा देख के मेरा लौड़ा खड़ा हो गया ! उसने एकदम से दरवाज़ा बंद कर लिया ! फिर मैं वहां से चला गया ! पर वहां से जाने के बाद भी मुझे उसका नंगा बदन याद आ रहा था !

    उस दिन मैं उसके बारे में ही सोचता रहा ! फिर दूसरे दिन जब मैं उसके घर गया तो वरुण की तबियत बहुत ख़राब थी ! वो सोया हुआ था ! उसकी बहन दूसरे कमरे में लेट कर टी-वी देख रही थी ! उसने मुझे आवाज़ दी,"मिथ्स इधर आ ! तूने नया मोबाइल लिया ?"

    मैं बोला,"हाँ !"

    वो बोली,"दिखा, कैसा है?"

    मैं एकदम से डर गया क्यूंकि मेरे मोबाइल में ब्लू फिल्म थी ! मैंने उसको फोल्डर के बहुत अन्दर छुपा के रखा था ! फिर मैंने उसे मोबाइल दिया ! मुझे क्या पता था कि उसे मेरे मोबाइल की पूरी समझ आ जायेगी, वो बोली,"तेरे पास तो बहुत गाने हैं! मुझे भी दे !"

    मैंने उसे पूरे गाने एक साथ भेज दिए और वहां से चला गया! थोड़ी देर बाद जब वापस आया तो उससे मोबाइल माँगा ! वो बोली," दो मिनट रुक जा! बस हो ही गया है और वो मुझसे बाते करने लगी! उसने मुझे पूछा ,"क्या तेरी कोई गर्लफ्रेंड है?"

    मैंने कहा,"नहीं !"

    फिर वो एकदम से बोली,"तू इतना बड़ा हो गया है (उस समय मेरे उम्र १८ साल की थी) और तेरी एक भी गर्लफ्रेंड नहीं है?"

    मैंने भी उसे पूछा,"क्या तेरा कोई बॉयफ्रेंड नहीं है?"

    उसका भी जवाब न में ही आया ! फिर उसने कहा,"छोड़, जाने दे !"

    फिर वो मोबाइल में और गाने ढूँढने लगी तो एकदम से उसे ब्लू फिल्म वाला फोल्डर दिखा ! वो एकदम से चौंक गई ! उसके मुंह से हुउऊ........ करके आवाज़ निकली! मैं एकदम से डर गया ! उसे पूछा," क्या हुआ ?"

    तो वो बोली,"बच्चू ! १८ साल का भी नहीं हुआ और अभी से ऐसी चीज़ें देखता है? "

    मैं बहुत डर गया ! उसे पूछा,"क्यूँ, क्या हुआ ?"

    उसने कहा," यह क्या हैं ?"

    मैं चुप हो गया ! फिर थोड़ी देर बाद मैं बोला," तुझे उससे क्या? तुझे जो लेना है वो ले और मोबाइल वापस दे !"

    फिर मैंने एकदम से उसे पूछा," इतनी भोली मत बन ?? जैसे मुझे कुछ पता ही नहीं कि तू भी चुपके से ब्लू फिल्म देखती है!"

    वो मुझे बोली," तुझे कैसे पता?"

    मैं बोला,"उस दिन जब मैंने तुझे बाथरूम में देखा था तो तू मोबाइल पर ब्लू फिल्म देख रही थी और अपनी चूत में ऊँगली डाल रही थी!"

    वो एकदम से डर गई और मुझे बोली,"चुप बैठ !"

    फिर वो मुझे बोली," सॉरी! मैं तेरी बात किसी को नहीं बताउंगी तो तू भी मेरी बात मत बताना !!!"

    मैंने कहा,"ठीक है !"

    फिर हम नोर्मल हो के बातें करने लगे ! फिर उसने मुझे पूछा," क्या तूने कभी किसी के साथ सेक्स किया है?"

    मैंने कहा,"नहीं ! अभी तक मेरी कोई गर्लफ्रेंड ही नहीं है तो किसको चोदूंगा?"

    उसने कोई जवाब नहीं दिया ! फिर मैंने उसे एकदम से एक क्लिप दिखाया ! वो बोली," क्या है और दखने लगी !" वो शरमा गई !

    मैं बोला,"शरमा मत ! हमारे अलावा कोई नहीं है! देख ले ! न जाने फिर कब देखने को मिले ?"

    वो देख रही थी ! अचानक मुझे पता नहीं क्या सूझा, मैं उसके बाजू में जा कर बैठ गया और हम साथ-साथ उस क्लिप को देखने लगे ! वो बहुत गरम हो गई थी और मेरा लौड़ा भी तन गया था ! मैंने जान-बूझ कर उसकी टांगों पर हाथ लगाया ! उसने मेरा हाथ हटाया पर मैं मानने वाला नहीं था! मैंने उसका हाथ मेरे लौड़े पे रख दिया! उसने मुझे डांट दिया और बोली,"अच्छे से रहो !"

    मैंने उसको पूछा ," क्यूँ न हम भी पहली बार सेक्स करके देखें ?"

    वो बोली,"पागल है क्या?"

    मैंने कहा," ठीक है ! तो मुझे सिर्फ एक बार तेरे स्तन ही दिखा दे !"

    वो बोली," नहीं!"

    मैंने जबरदस्ती उसके टॉप पर अपना हाथ लगाया ! वो जोर से चिल्लाई ! मैंने एक हाथ से उसका मुंह दबा दिया और उसके स्तन दबाने लगा ! वो छटपटाने लगी ! मैंने उसका टॉप उतार दिया और उसके वक्ष जोर से दबाने लगा! वो भी शांत हो गई! मैं उसके बूब्स चूसने लगा !

    वो बोली," यह गलत है! अगर कोई आ गया तो हम फंस जायेंगे !"

    मैंने कहा,"तू उसकी चिंता मत कर ! मै सारे दरवाजे बंद करके आया हूँ !"

    वो बोली,"अगर वरुण आ गया तो ?"

    मैंने कहा,"उसका भी दरवाज़ा बंद कर दिया है!"

    फिर मैंने अपने कपड़े उतार दिए और अपना लौड़ा उसके हाथ में दे दिया और कहा," अब इसे मुंह में ले और लॉलीपोप जैसा चूस !"

    वो बोली," तू भी तो मेरी चूत चाट !"

    फिर मैं उसकी चूत की तरफ लेट गया और अपना लौड़ा उसके मुंह में दे दिया ! हम दोनों ५-७ मिनट तक चूसते ही रहे ! फिर मैंने उसको सीधा किया और अपने लौड़े पर क्रीम लगाई ! मैंने उसकी चूत पर भी बहुत सारी क्रीम लगा दी !

    वो बोली,"कंडोम नहीं है?"

    मैंने कहा,"झड़ने से पहले ही निकाल लूँगा !"

    वो बोली,"पक्का निकाल लेना !"

    फिर मैंने उसकी चूत के बीच में अपना लौड़ा रखा और धीरे-धीरे अन्दर डालने लगा ! वो चिल्ला रही थी," बहुत दर्द हो रहा है...........बाहर निकाल !!!!!!!!!!"

    पर मैं कहाँ मानने वाला था !!! मैंने जोर से झटका मारा और मेरा ७ इंच का लौड़ा उसकी चूत में पूरा घुस गया ! वो जोर से चिल्लाई..................! मैंने उसका मुँह दबा दिया ! वो रो रही थी ! उसकी चूत में से खून आ रहा था ! फिर मैं धीरे-धीरे डालने लगा ! करीब १५ मिनट तक उसे चोदता रहा ! पहले वो चिल्लाती रही लेकिन फिर उसे भी मज़ा आने लगा ! वो भी नीचे से झटके देने लगी ! थोड़ी देर बाद उसकी चूत में से पानी आने लगा !

    मैं उसे और जोर से चोदने लगा ! कुछ देर बाद मैं भी झड़ गया ! चुदाई करते-करते मेरे ध्यान में कुछ भी नहीं रहा और मैंने पूरा वीर्य उसकी चूत में ही डाल दिया ! उसके भी ध्यान में यह बात नहीं आई ! थोड़ी देर बाद जब हम अलग हुए तो वो बोली,"यह हमने क्या किया ? बिना प्रोटेक्शन के ही सेक्स किया ? और तुमने पूरा वीर्य मेरी चूत में ही डाल दिया ??"

    वो रोने लगी और बोली ,"अगर मैं गर्भवती हो गई तो ?"

    मैंने कहा," तू डर मत ! मैं तुझे आई-पिल (गर्भ निरोधक दवा) ला दूंगा ! वो ले लेना और मैं उठ गया !"

    उसने बिस्तर पर देखा तो वो डर गई ! उसका खून पड़ा हुआ था ! मैंने कहा,"डर मत ! पहली बार में सबका खून निकलता है !"

    फिर मैं वहां से चला गया ! दूसरे दिन मैं फिर से उसे मिलने आया और उसे आई-पिल दी और बोला," कल मजा आया न ? आज फिर से सेक्स करेंगे ! आज तो मंहगा वाला कंडोम भी लाया हूँ !"

    उस दिन हम फिर से सेक्स करने लगे !

  • Bas padho or kuch mat karo

    मैं कॉलेज में आ चुका था। मेरे एक पुराना दोस्त मेरे साथ में मेरे घर में रहता था। हम दोनो पक्के दोस्त थे और एक दूसरे को बहुत चाहते थे। सेक्स के मामले में मैं बहुत झिझकता था। इतनी तो मेरी बड़ी दीदी भी नही शर्माती थी।

    मैं जब सुबह जागता था तो मेरे लण्ड में पेशाब भरे होने के कारण वो खड़ा हो जाता था। दीदी बस यही देखने के लिये सुबह मेरे कमरे में आ जाती थी और मेरे खड़े लौड़े को देख कर आहे भरती थी। अपनी चूत भी दबा लेती थी।

    मेरी नजर जब उस पर पड़ती तो मैं झेंप जाता था, पर दीदी बेशर्मों की तरह मुस्करा कर चली जाती थी। मुझे ये सब देख कर सनसनी आने लगती थी। दीदी के चूतड़ मस्त गोल गोल उभरे हुए थे, मेरे भी वैसे ही थे ... पर लड़की होने के कारण उसके चूतड़ ज्यादा सेक्सी लगते थे। उसकी चूंचिया भी भरी भरी गोल गोल मस्त उठान और उभार वाली थी। सीधी तनी हुई, किसी को भी दबाने के लिये निमन्त्रण देती हुई।

    मेरा दोस्त ज्यादातर मेरे बिस्तर पर ही सोता था। कितनी बार तो रात को वो मेरे चेहरे को चूम भी लेता था। मुझे लगता था वो मुझे बहुत प्यार करता है। कभी कभी मैं भी उसे चूम लेता था।

    इन दिनों उसमें कुछ बदलाव आ रहा था। हम जब कॉलेज साथ साथ जाते तो वो कभी कभी मेरी गाण्ड सहला देता था। मुझे बड़ा अच्छा लगता था। एक बार तो छत पर उसने मेरे पीछे आ कर अपना लण्ड मेरी गाण्ड में लगा दिया था। मुझे एक झुरझुरी सी आई थी। उसके लण्ड का कड़ापन मेरी गाण्ड को करण्ट मार रहा था। मैंने अपनी गाण्ड हटा ली। बात आई गई हो गई।

    रात को सोते समय उसने धीरे से मेरा लण्ड पकड़ लिया, मुझे अच्छा लगा। पर शरम के मारे मैंने उसका हाथ हटा दिया।

    एक बार रात को सोते समय अनजाने में मेरा हाथ जाने कैसे उसके लण्ड पर चला गया। रवि ने मेरा हाथ अपने लण्ड पर दबा दिया। शायद उसने ही अपने लण्ड पर मेरा हाथ रख दिया होगा। कुछ देर मैं सोने का बहाना करता रहा, उसका हाथ अब मेरे लण्ड पर आ गया ... मुझे बहुत मजा आया। मैं शान्त ही रहा। उसने अपना हाथ मेरे पजामे में डाल कर मेरा नंगा लण्ड पकड़ लिया। वो मेरा लण्ड सहलाने लगा।

    मैंने मन ही मन आह भरी और जब सहा नहीं गया तो दूसरी तरफ़ करवट ले ली। उसने लण्ड छोड़ दिया। अब मेरा लण्ड तड़प रहा था कुछ करने को ... पर क्या करने को ... शायद गाण्ड मारने को या मराने को ... वो पीछे से मेरे से चिपक गया और अपना लण्ड मेरे चूतड़ो में घुसाने की कोशिश करने लगा। चूतड़ो की दरार के बीच उसका लण्ड फ़ंसा हुआ अपनी साईज़ का अहसास दिला रहा था।

    मैंने अचानक जागने का नाटक किया,"अरे यार सो जा ना ... "

    "तुझे प्यार करने को मन कर रहा है ... " उसने अपनी झेंप मिटाने की कोशिश की।

    "ओह हो ... ये ले बस ... " मैंने करवट बदल कर उसे पकड़ कर चूम लिया पर उसने मुझे जबरदस्ती होंठ पर चिपका लिया और होंठ चूसने लगा।

    मैंने अलग होते हुए कहा,"ऐसे तो लड़किया करती हैं ... साले ... बस हो गया अब सो जा ... "

    "अभी आया ... " कह कर वो बाथ रूम गया, शायद अन्दर वो मुठ मार रहा था। कुछ देर में वो आ गया और अब वो शांति से सो रहा था। मुझे भी मुठ मारने की तेज इच्छा होने लगी थी, पर कुछ ही देर मेरा वीर्य बिस्तर पर ही निकल गया। मैंने अपना रूमाल पजामे में घुसा लिया और वीर्य पोन्छ दिया।

    हमने सिनेमा देखने का कार्यक्रम बनाया। हॉल लगभग खाली था। बालकनी में बस हम दोनों ही थे। पिक्चर शुरू होते ही रवि ने मेरा हाथ पकड़ लिया ... और फिर धीरे से हाथ छोड़ कर उसने मेरी जांघ पर रख दिया। मुझे पता था कि मुझे ये सिनेमा लाया ही इसीलिये है।

    आज मैंने सोचा कि ये अधिक परेशान करेगा तो मैं उठ कर चला जाऊंगा।

    पर उसके हाथों में जादू था। मेरी जांघ वो सहलाता रहा। मुझमें करण्ट दौड़ने लगा। धीरे से उसने मेरे लण्ड पर हाथ रख दिया। मुझे अजीब सा लगने लगा पर आनन्द भी आया। जैसे ही उसने लण्ड दबाया, मैंने उसका हाथ हटा दिया। उसने मुझे देखा फिर कुछ ही देर के बाद उसने हाथ फिर से मेरी जांघ पर रख दिया। कुछ ही देर के बाद उसने फिर कोशिश की और मेरे लण्ड पर हाथ रख दिया और हल्के से सहलाने लगा।

    मेरे मन में एक हूक सी उठी ... हाय ... कितना मजा आ रहा है ... । पर दिल नहीं माना ... उसका हाथ मैंने फिर से हटा दिया। उसने भी हिम्मत नही हारी ... और कुछ ही देर में उसने फिर मेरे लण्ड पर हाथ रख दिया और दबाने लगा। पर यहाँ मैंने हिम्मत हार दी और उसे करने दिया।

    वो मेरा लण्ड दबाने लगा ... और अपनी अंगुलियां से दोनो ओर से लण्ड को दबा कर सहलाने लगा। मुझे कोई विरोध ना करते देख कर वो खुश हो गया। और मेरी पेन्ट की ज़िप खोल दी ... अब उसका हाथ मेरे अंडरवीयर को ऊंचा करके नंगे लण्ड तक पहुंच गया था। उसने अपने हाथ में उसे पूरा भर लिया। मुझे आनन्द की एक तरावट सी आ गई। मुझे लगने लगा कि काश मेरा मुठ मार दे और मेरा वीर्य निकाल दे।

    "कैसा लगा ... बता ना !" उसने मुझसे फ़ुसफ़ुसा कर पूछा।

    "बस रवि ... अब हाथ हटा ले यार ... "

    "अरे नहीं ... देख बहुत मजा आता है ... " कह कर उसने लण्ड पेन्ट से बाहर निकाल लिया। मेरा मन खुशी से भर गया। मैंने अपना हाथ उसके लण्ड की तरफ़ बढा दिया और बाहर से उसे पकड़ लिया।

    "तुझे भी मजा आया क्या ... " मैंने उससे पूछा और उसके पेन्ट के अन्दर हाथ डाल दिया उसने अन्दर चड्डी नही पहन रखी थी, सीधे लण्ड से हाथ टकरा गया। उसे मसलते हुए मैंने बाहर निकाल लिया। अब वह मेरे लण्ड को हौले हौले घिस रहा था, और मैं उसके लण्ड को घिस रहा था। तभी इन्टरवेल हो गया।

    हॉल की लाईटें जल उठी। दोनो के लण्ड बाहर मस्त हो कर लहरा रहे थे। मैंने शरमा कर लण्ड एक दम पेन्ट के अन्दर डाल लिया।

    "चल यार ... अब चलें ... कही आराम से मजे करते हैं ... "

    "ओके ... चल ... ।" बाहर आकर मैंने स्टैण्ड से अपनी मोटर साईकल निकाली और नेहरू गार्डन चले आये। रात हो चुकी थी, भीड़ भी कम थी। हम दोनो एक एकान्त की ओर बढ़ गये। एक घने झाड़ के नीचे बैठ गये।

    "आजा अब मस्ती करते हैं !" मुझे तो वही मस्ती आ रही थी, मैंने तुरन्त अपना लण्ड निकाल दिया। उसने मेरा लण्ड पकड़ कर अब फ़्री स्टाईल में मुठ मारना चालू कर दिया। मैं झूम उठा ...

    "मजा आ रहा है ना ... देख घर पर तबीयत से चुदाना ... "

    " चुदाना ? मैं क्या लड़की हूँ ... साले ... आह्ह्ह भोसड़ी के ... मस्त मजा आ रहा है ... तू भी अपना लौड़ा निकाल ना ... ला मसल दूँ ... "

    "निकाल तो रखा है यार ... तू तो मस्ती में खोया है ... " मैंने उसका लण्ड पकड़ लिया और मसलने लगा। उसने मुझे लिपटा लिया और मेरे होंठो को चूमने लगा। मैं भी प्रति-उत्तर में उसे चूमने लगा। हम दोनो मदहोशी में भूल गये कि हम गार्डन में है।

    लण्ड मसलने से कुछ ही देर में मेरा वीर्य छुट गया, कुछ ही देर में वो भी झड़ गया। हमें झड़ने के बाद होश आया। देखा तो पूरा गार्डन सूना था ... हम उठ खड़े हुये, लण्ड को पेण्ट के भीतर डाला और उठ खड़े हुए।

    "थेन्क्स यार ... बड़ा मजा आया ... " और हम चल दिये।

    घर आ कर मुझे बड़ी घिन आने लगी कि हाय मैं ये क्या कर रहा था? मैंने अलमारी से दारू की बोतल निकाली और दो पेग बना कर पी गया। खाना खा कर हम सोने की तैयारी करने लगे। मुझे नशे में फिर से वासना की खुमारी चढ़ने लगी। इतने में दीदी आ गई।

    "रवि, आज लगता है कोई खास बात है ... ।"

    "नहीं दीदी ... ऐसा तो कुछ भी नहीं है ... "

    "अरे बता दे ना ... आज कितनी मस्ती मारी है हमने ... मजा आ गया !" मैंने नशे में कहा।

    "भैया आप ही बता दो ना ... !" दीदी ने मुझसे पूछा।

    "अरे दीदी, क्या बताऊँ ... इस साले ने मेरा लण्ड का मुठ मार कर माल ही निकाल दिया" मैंने हिचकी लेते हुये कहा।

    ‘दीदी ये तो बहक रहा है ... "रवि ने शर्माते हुए कहा।

    "अच्छा तो ये बात है ... अकेले अकेले मजे कर रहे हो ... " दीदी मुस्कराई।

    और मुड़ कर चली गई। मैंने अपने कपड़े उतारे और बिस्तर पर लेट गया ... रवि ने भी मौका देखा और लाईट बंद कर दी और वो भी नंगा हो कर लेट गया। कुछ ही देर बाद हम दोनो एक दूसरे का लण्ड मसल रहे थे ... मुझे बड़ा आनन्द आ रहा था। मुझे लग रहा था कि कुछ करना चहिये ... पर क्या ?

    "गाण्ड मरवाओगे क्या ... "

    "क्या ... क्या मरवाओगे ... "

    "मेरा मन, तेरी गाण्ड में लण्ड घुसेड़ने को कर रहा है ... देख मजा आयेगा राजू ... "

    "पर यार छेद तो छोटा सा है ... " मुझे पता था कि लण्ड गाण्ड में घुसेड़ कर उसे चोदी जाती है ... पर मैं मसूम ही बना रहा।

    "लौड़ा घुस जायेगा ... देख उल्टा लेट जा ... ये तकिया भी नीचे लगा ले ... "

    मैं नीचे तकिया लगा कर लेट गया, मेरी गाण्ड और ऊंची हो गई। उसने मेरी गाण्ड ने थूक लगाया और वो मेरी पीठ पर चिपक गया और मेरी गाण्ड में अपना लण्ड घुसेड़ने लगा। उसके लण्ड ने मेरी गाण्ड के छेद में ठोकर मारी। मुझे गुदगुदी सी हुई। मैंने अपनी गाण्ड खोल दी उसने जोर लगा कर लण्ड का सुपाड़ा गाण्ड में घुसेड़ दिया और आगे हाथ बढा कर मेरा लण्ड पकड़ लिया। उसने जोर मार कर लण्ड अन्दर घुसा मारा ...

    मेरी गाण्ड नरम थी, जवान थी ... पूरा लण्ड निगल गई। अब उसने धक्के मारने शुरू कर दिये ... मुझे थोड़ी सी जलन हुई, पर मजा अधिक आया। पहली बार लण्ड से गाण्ड मरा रहा था। वो मुझे चूमने चाटने लगा ... मेरा लण्ड तकिये से दबा हुआ सिसक रहा था ... और जोर मार रहा था।

    रवि तो मस्ती में चूर था ... पूरे जोश के साथ मेरी गाण्ड चोद रहा था और कुछ ही देर में वीर्य निकाल दिया। रवि निढाल सा एक तरफ़ लुढ़क गया।

    "राजू, तेरी बहन को चोद डाले क्या?" रवि ने गहरी सांस भरते हुए कहा।

    "साले मरवायेगा क्या ... ?"

    "नहीं यार ... बड़ी सेक्सी है ... चल यार कोशिश करते हैं ... अपना लण्ड का माल उसी से निकाल लेना !"

    "अच्छा, चल कोशिश करते हैं ... देख बात बिगड़े तो सम्हाल लेना !"

    रवि ने हामी भर दी। मेरी दीदी की नजर तो मुझ पर थी ही ... मुझे लगता था कि काम हो ही जायेगा ... । हम दोनों बिस्तर से उठे और तोलिया लपेट लिया और दबे पांव दीदी के कमरे में सामने चले आये। कमरे में बाहर की लाईट का खासा उजाला था ... दीदी दोनों पांव चौड़े करके और स्कर्ट ऊंची करके लेटी हुई थी। मैं दीदी के बिस्तर पर उसके पास बैठ गया।

    दीदी ने धीरे से आंखे खोली,"राजू ... क्या हुआ ... ये सिर्फ़ तोलिया लपेटे क्यूँ घूम रहे हो ... ?"

    मैं थोड़ा नर्वस हो गया। पर रवि बोल उठा,"दीदी ... आप लेटी रहो ... राजू ... चल कर ना ... "

    मैंने दीदी की चूंचियों की तरफ़ हाथ बढ़ाया। दीदी सब समझ चुकी थी। मुस्करा उठी ...

    मेरे हाथ उसके बोबे तक आ चुके थे ...

    "राजू ... घबरा मत ... पकड़ ले और दबा दे ... !"

    मेरी हिम्मत खुल गई," दीदी ... थेन्क्स ... " और मैंने धीरे से दीदी के बोबे पकड़ कर दबा दिये।

    "अरे, शरमा मत ... मसल दे ... मजा ले ले दीदी का ... और मजा दे दे दीदी को ... " दीदी सिसक उठी, जाने कब से बेचारी चुदासी थी ...

    उसने मेरा तौलिया उतार दिया और रवि ने मुझे बिस्तर पर धक्का दे दिया ...

    "बस बस ... चढ़े ही जा रहे हो ... " वो उठ कर बैठ गई ... और भाग कर अपना दरवाजा अन्दर से बंद कर दिया। रवि ने उसे अपनी तरफ़ खींच लिया और उसका एक चूतड़ दबा लिया।

    "दीदी, आपकी बाटिया यानी चूतड़ सोलिड हैं ... बॉल भी बड़े कसे हुए हैं ...! "

    "तू भी तो रवि सोलिड है ... भैया की अभी गाण्ड मारी है ना ... उसकी बाटिया मेरी जैसी ही तो है ... !"

    "दीदी ... आपने सब देखा है क्या ... " मैं चौंक गया। दीदी मुस्कुरा उठी।

    "राजू जवानी लगी है अभी ... इसमें सब चलता है ... देख मैं भी अभी चूत मरवाऊंगी और इसकी प्यास बुझाउंगी, रवि से गाण्ड मरवाउंगी ... साला हरामी मस्त गाण्ड चोदता है !" और खिलखिला कर हंस पड़ी।

    रवि से हट कर दीदी मेरे पास आई,"भैया ... पहले आपका हक बनता है ... देखो प्यार से चोदना ... तेरी मस्त चूतड़ो की तो मैं भी दीवानी हूँ !"

    "और मैं भी दीदी ... तेरी चूतड़ो की गहराई देख कर तो मेरा लण्ड कब से चोदने को बेताब हो रहा था।"

    "हाय रे भैया, तो देरी किस बात की है ... चोद दे ना ... " और वो मेरे से लिपट पड़ी।

    मैंने उसे तुरन्त घोड़ी बनाया और और उसे अपने से चिपका लिया। रवि लपक कर आया और नीचे से मेरा कड़क लौड़ा उसकी चूत के द्वार पर रख दिया।

    "मार राजू ... चोद दे दीदी को ... पर देख प्यार से ... दीदी अपनी ही है ... " रवि के स्वर में प्यार झलक रहा था।

    मैंने धीरे से लण्ड दीदी की चूत में ठेल दिया।

    लण्ड का प्रवेश होते ही उसके मुख से प्यारी सी सिसकारी निकली और उसने प्यार भरी निगाहों से मुझे देखा,"भैया ... रहम मत करना ... साले लौड़े को जोर से ठोक दे ... बहुत महीनों बाद लौड़ा खा रही हूं !"

    "हाय दीदी ... ये लो ... मुझे भी मत रोकना ... मेरा तो रोम रोम सुलग रहा है ... पहली बार मुझे भी कोई चूत मिली है ... !"

    मैंने जोर लगा कर लण्ड चूत की जड़ तक बैठा दिया। रवि ने मेरी गाण्ड सहलानी चालू कर दी। उसका लण्ड भी बेकाबू हो रहा था। मैंने दीदी की चूंचिया दबा कर पकड़ ली और मसलते हुए पूरी ताकत से लौड़ा खींच कर दे मारा।

    "आह राजू ... ये हुई ना बात ... अब ढेर सारे जोर की ठोकरे दे मार ... साली चूत को मजा आ जाये ... "

    मैं जैसे ये सुनते ही पगला गया ... जोर जोर से उसकी चूत में लण्ड घुसेड़ कर चोदने लगा ... पर जवानी तो दीदी पर पूरी तरह से छाई हुई थी ... उसकी चूत लपक लपक कर लौड़ा ले रही थी। तभी मुझे लगा रवि भी अपना संयम खो बैठा और उसने मेरी गाण्ड में अपना लण्ड घुसेड़ दिया।

    "राजू प्लीज ... तेरे गोल गोल चूतड़ मारने को कर रहा है ... !" रवि ने कहा।

    "अरे रुक जा साले ... दीदी की गाण्ड और भी मस्त है ... ठहर जरा ... दीदी, आप दोनो छेद से मजा लो ना ... "

    दीदी तो वासना की आग में जली जा रही थी ...

    "हाय आगे से और पीछे से ... दोनो तरफ़ से चोदोगे ... माँ मेरी ... चल पोजिशन ले ... आज तो तुम दोनों मुझे मस्त करके ही छोड़ोगे !"

    मैं बिस्तर पर चित्त लेट गया और दीदी ने ऊपर आ कर मेरा लण्ड चूत में डाल लिया और पूरा घुसेड़ कर जड़ तक बैठा लिया ... और दोनों पांव से अपने चूतड़ ऊपर उठा लिये। रवि तुरन्त लपक कर बिस्तर पर चढ़ गया और उसकी खुले हुये चूतड़ो के पट में लण्ड रख दिया। दीदी ने रवि को देखा और मुस्कुरा दी और लण्ड गाण्ड में सरक गया।

    "हाय रवि ... भारी है ... पर हां, कस के गाण्ड मारना ... ये जवान लड़की की गाण्ड है ... खूब लेती है और भरपूर लेती है !"

    रवि तो सुनते ही जोश में आ गया और पहले धीरे धीरे और फिर जो जोर पकड़ा तो दीदी को भी मजा आ गया। अपनी गाण्ड उभार कर चुदाने लगी।

    "वाकई, राजू ... दीदी की गाण्ड तो मस्त है ... जबरदस्त चोदने लायक है ...! " मैं नीचे उसके बोबे मसल मसल कर लण्ड उछाल उछाल कर दीदी को चोद रहा था। दीदी दोनों तरफ़ से चुद कर मस्त हो चली थी।

    अब मुझे लगा कि मेरी नसें खिंचने लगी हैं ... सारा कुछ लण्ड के रास्ते निकलने वाला है ... मैं सिसक उठा,"दीदी ... प्यारी दीदी ... मेरा तो निकला ... हाय ... "

    दीदी मुझसे चिपक गई ... "राजू ... निकाल दे ... मस्त हो जा ... रवि है ना, वो चोद देगा ... तू झड़ जा ... आराम से ... हां"

    "दीदी ... तेरी तो ... हाय ... भेन की चूत ... मैं गया ... अरे रे रे रे ... ओह्ह्ह्ह्ह्ह हा हाऽऽऽऽऽ।"

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