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aalokdayaram

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Blog / रोग विनाशक कारगर नुस्ख

Saturday, 11 June 2011 at 00:24

रोग विनाशक कारगर नुस्खे
माडर्न मेडिसीन के दुष्प्रभाव अब आम तौर पर देखने में आ रहे हैं। इसलिये लोगों का रूझान सैंकडों साल से आजमाये जा चुके घरेलू और कुदरती पदार्थों से निर्मित नुस्खों से ईलाज करने की ओर देखा जा रहा है। इन नुस्खों के घटक पदार्थ हर कहीं आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं|विधिपूर्वक लेने से शरीर पर इनका कोइ दुष्प्रभाव भी नहीं होता है|

about me:-

dr.aalok dayaram,
Bolia(Garoth-Mandsaur)M.P.,india, Madhya Pradesh, India
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dr. alok dayaram,M.A.,Ayurved Ratna,D.I.Hom(London);sanchalak akhil bharatiy damodar darji mahasangh,mob: 09926524852

स्मरण शक्ति बढाने के सरल उपचार. how to enhance memory power?
स्मरण शक्ति की कमजोरी या विकृति से विद्यार्थी और दिमागी काम करने वालों को असुविधाजनक स्थिति से रुबरु होना पडता है। यह कोई रोग नहीं है और न किसी रोग का लक्छण है। इसकी मुख्य वजह एकाग्रता(कन्संट्र- शन) की कमी होना है। स्मरण शक्ति बढाने के लिये दिमाग को सक्रिय रखना आवश्यक है। शरीर और मस्तिष्क की कसरतें अत्यंत लाभदायक होती हैं। किसी बात को बार-बार रटने से भी स्मरण शक्ति में इजाफ़ा होता है और वह मस्तिष्क में द्रडता से अंकित हो जाती है। आजकल कई तरह के विडियो गेम्स प्रचलन में हैं । ये खेल भी मस्तिष्क को ताकतवर बनाने में सहायक हो सकते हैं|पत्र-पत्रिकाओं- में प्रकाशित पहेलियां हल करने से भी मस्तिष्क की शक्ति बढती है।
मैं नीचे कुछ ऐसे सरल उपचार प्रस्तुत कर रहा हूं जो मेमोरी पावर बढाने मे अत्यंत उपकारी सिद्ध होते हैं--

१) बादाम ९ नग रात को पानी में गलाएं।सुबह छिलके उतारकर बारीक पीस कर पेस्ट बनालें। अब एक गिलास दूध गरम करें और उसमें बादाम का पेस्ट घोलें। इसमें ३ चम्मच शहद भी डालें।भली प्रकार उबल जाने पर उतारकर मामूली गरम हालत में पीयें। यह मिश्रण पीने के बाद दो घंटे तक कुछ न लें। यह स्मरण शक्ति वृद्दि करने का जबर्दस्त उपचार है। दो महीने तक करें।

२) ब्रह्मी दिमागी शक्ति बढाने की मशहूर जडी-बूटी है। इसका एक चम्मच रस नित्य पीना हितकर है। इसके ७ पत्ते चबाकर खाने से भी वही लाभ मिलता है। ब्राह्मी मे एन्टी ओक्सीडेंट तत्व होते हैं जिससे दिमाग की शक्ति घटने पर रोक लगती है।

३) अखरोट जिसे अंग्रेजी में वालनट कहते हैं स्मरण शक्ति बढाने में सहायक है। नियमित उपयोग हितकर है। २० ग्राम वालनट और साथ में १० ग्राम किशमिस लेना चाहिये।

४) एक सेवफ़ल नित्य खाने से कमजोर मेमोरी में लाभ होता है। भोजन से १० मिनिट पहिले खाएं।

५) जिन फ़लों में फ़ास्फ़ोरस तत्व पर्यात मात्रा में पाया जाता है वे स्मरण शक्ति बढाने में विशेषतौर पर उपयोगी होते है। अंगूर ,खारक ,अंजीर एवं संतरा दिमागी ताकत बढाने के लिये नियमित उपयोग करना चाहिये।

६) भोजन में कम शर्करा वाले पदार्थ उपयोगी होते हैं। पेय पदार्थों में भी कम ्चीनी का प्रयोग करना चाहिये।इन्सुलीन हमारे दिमाग को तेज और धारदार बनाये रखने में महती भूमिका रखता है। इसके लिये मछली बहुत अच्छा भोजन है। मछली में उपलब्ध ओमेगा ३ फ़ेट्टी एसीड स्मरण शक्ति को मजबूती प्रदान करता है।

७) दालचीनी का पावेडर बनालें। १० ग्राम पावडर शहद में मिलाकर चाटलें। कमजोर दिमाग की अच्छी दवा है।

८) धनिये का पावडर दो चम्मच शहद में मिलाकर लेने से स्मरण शक्ति बढतीहै।

९) आंवला का रस एक चम्मच २ चम्मच शहद मे मिलाकर उपयोग करें। भुलक्कड पन में आशातीत लाभ होता है।

१०) अदरक ,जीरा और मिश्री तीनों को पीसकर लेने से कम याददाश्त की स्थिति में लाभ होता है।

११) दूध और शहद मिलाकर पीने से भी याद दाश्त में बढोतरी होती है। विद्ध्यार्थियों के लिये फ़ायदेमंद उपचार है।२५० मिलि गाय के दूध में २ चम्मच शहद मिलाकर उपयोग करना चाहिये।

१२) तिल में स्मरण शक्ति वृद्दि करने के तत्व हैं। २० ग्राम तिल और थोडा सा गुड का तिलकुट्टा बनाकर नित्य सेवन करना परम हितकार उपचार है।

१३) काली मिर्च का पावडर एक चम्मच असली घी में मिलाकर उपयोग करने से याद दाश्त में इजाफ़ा होता है।

१४) गाजर में एन्टी ओक्सीडेंट तत्व होते हैं। इससे रोग प्रतिरक्छा प्राणाली ताकतवर बनती है। दिमाग की ताकत बढाने के उपाय के तौर पर इसकी अनदेखी नहीं करना चाहिये।

१५) आम रस (मेंगो जूस) मेमोरी बढाने में विशेष सहायक माना गया है। आम रस में २ चम्मच शहद मिलाकर लेना उचित है।

१६) पौष्टिकता और कम वसा वाले भोजन से अल्जाईमर्स नामक बीमारी होने का खतरा कम रहता है और दिमाग की शक्ति में इजाफ़ा होता है इसके लिये अपने भोजन में ताजा फ़ल-सब्जियां.मछलिय- ां ,ओलिव आईल आदि प्रचुरता से शामिल करें।

१७) तुलसी के ९ पत्ते ,गुलाब की पंखुरी और काली मिर्च नग एक खूब चबा -चबाकर खाने से दिमाग के सेल्स को ताकत मिलती है।
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उल्टी होने का घरेलू इलाज: home remedies to cure vomiting.

उल्टी(वमन) होने के कारण
आमाषय की मांसपेशी के आक्छेपिक संकुचन से भोजन पदार्थ और तरल पदार्थ का वेग से मुख मार्ग से निकलना वमन कहलाता है। उल्टी होने के कै कारण हो सकते हैं। जरूरत से ज्यादा खाना ,अधिक मात्रा में शराब पीना,गर्भावस्था,और- पे्ट की गडबडी,माईग्रेन(आधा- शीशी ) इस रोग के मुख्य कारण हैं। गर्मी के मौसम में भोजन विशाक्तता(फ़ूड पाइजिनिंग) और ज्यादा गर्मी से वमन होने लगती है। तेज शिरोवेदना से भी उल्टी होने की स्थिति बन जाती है। पेट में कीडे होने और खांसी की वजह से भी उल्टी होती है।
अब यहां उल्टी होने की घरेलू चिकित्सा लिखता हूं-

१) एक गिलास पानी में एक निंबू निचोड लें ,थोडी शकर घोल लें। यह निंबू की शिकंजी पीने से उल्टी रोग में फ़ायदा होता है।

२) मूंग भून लें। २० ग्राम लेकर का काढा तैयार करें। आधा कप काढे में शकर या शहद मिलाकर पीने से उल्टी बंद होगी। साथ में दस्त लग रहे हों तो भी लाभ होगा।

३) धनिये का चूर्ण ३ ग्रामलें, १२ ग्राम चावल का माड में मिलाकर दिन में ३-४ बार देने से उल्टी नियंत्रण में आ जाती है।

४) अदरक और धनिये का रस १०-१० मिलि मिलाकर पीने से फ़ौरन राहत मिलती है। पुदिने का रस ५ मिलि थोडी-थोडी देर में पीने से भी उल्टी रोग का निवारण होता है।

४) नींबू के छिलके छाया में सूखा लें। इन छिलकों को जलाकर राख करलें। राख का चूर्ण बोतल में भर लें । एक ग्राम नींबू की राख में शहद मिलाकर यह चटनी २-२ घंटे के फ़ासले से लेने पर उल्टी बंद होगी।

५) नींबू को काटकर उस पर चुटकी भर कालीमिर्च का पावडर और सेंधा नमक बुरककर आग पर सेक लें । इसे चूसने से उल्टी और पेट के विकारों में तुरंत लाभ होता है।

६) गर्भवती स्त्री सुबह गुन गुने पानी में नींबू का रस मिलाकर पीये तो उल्टी में लाभ मिलता है।

७) गर्मी के मौसम में बर्फ़ चूसने से उल्टी बंद हो जाती है।

८) लौंग को भुन लें। मुहं मे रककर चूसने से उल्टी नियंत्रित होती है।

९) तुलसी के रस में शहद मिलकर सेवन करने से वमन बंद होती है।

१०) एक कप पानी में १० ग्राम शहद मिलाकर पीने से उल्टी रूक जाती है।

११) हींग को थोडे से पानी में घोलकर पेट पर मालिश करने से उल्टी में राहत मिल जाती है।

१२) आलू बुखारा मुहं में चूसने से उल्टी मे लाभ होता है। सूखा आलू बुखारा चूसने से गर्भवती की उल्टी में आशातीत लाभ होता है।

१३) दूध को फ़ाडलें। इसमें थोडी मिश्री मिलाकर १५-१५ मिनिट में आधा कप पीने से उल्टी बंद हो जाती है।

१४) मौसंबी का रस निकालकर उसमे थोडा सेंधा नमक डालकर एक-एक घंटे से पीने से उल्टी में फ़ायदा होता है।

15) ) रोगी को मूंग के दाल की खिचडी दही के साथ खिलानी चाहिये।
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अतिसार रोग :कारण एवं निवारण के उपाय
असंतुलित और अनियमित खान-पान से,दूषित पानी उपयोग करने से,खाली पेट चाय पीने से, अधिक ठंडे पदार्थों के सेवन करने से,अखाद्य और विजातीय पदार्थ भक्छण करने से ,पाचन क्रिया ठीक न होने से,लिवर की प्रक्रिया में व्यवधान आने से प्राय: अतिसार रोग की उत्पत्ति होती है।इस रोग में रोगी को आम युक्त पानी जैसे पतले दस्त होने लगते हैं। बार-बार शोच के लिये जाना पडता है। रोग लम्बा चलने पर रोगी बहुत दुर्बल हो जाता है और ईलाज नहीं लेने पर रोगी की मृत्यु भी हो जाती है।
अतिसार रोग के लक्छण-
रोगी को बार-बार मल त्यागने जाना,नाभी के आस पास व पेटमें मरोड का दर्द होना,गुड गुडाहट की आवाज के साथ दस्त होना,दस्त में बिना पचा हुआ आहार पदार्थ निकलना,हवा के साथ वेग से दस्त बाहर निकलना,पसीना, बेहोश हो जाना, दस्तों में शरीर का जल निकल जाने से डिहाईड्रेशन की हालत पैदा हो जाना-ये अतिसार रोग के प्रमुख लक्छण हैं।
अब यहां अतिसार की सरल चिकित्सा लिख रहा हूं। अतिसार को तुरंत रोकने का प्रयास घातक भी हो सकता है। आहिस्ता-आहिस्ता अतिसार नियंत्रित करना उत्तम है।

1) अतिसार रोग दूर करने का एक साधारण उपाय है केला दही के साथ खाएं। इससे दस्त बहुत जल्दी नियंत्रण में आ जाते हैं।

२) एक नुस्खा बनाएं। आधा चम्मच निंबू का रस,आधा चम्मच अदरक का रस और चौथाई चम्मच काली मिर्च का पवडर मिश्रण करलें। यह नुस्खा दिन में दो बार लेना उचित है।

३) अदरक की चाय बनाकर पीने से अतिसार में लाभ होता है और पेट की ऐंठन दूर होती है।

४) भूरे चावल पोन घंटे पानी में उबालें।छानकर चावल और पकाये हुए चावल का पानी पीयें। दस्त रोकने का अच्छा उपाय है।

५) आम की गुठली का पावडर पानी के साथ लेने से अतिसार ठीक होता है।

६) निंबू बीज सहित पीस लें और पेस्ट बनालें। एक चम्मच पेस्ट दिन में तीन बार लेने से अतिसार में फ़ायदा होता है।

७) अदरक इस रोग की अच्छी दवा मानी गई है। करीब १०० मिलि गरम पानी में अदरक का रस एक चम्मच मिलाकर गरम-गरम पीयें। अतिसार में अच्छे परिणाम आते हैं

८) एक खास बात याद रखें कि अतिसार रोगी पर्याप्त मात्रा में शुद्ध जल पीता रहे। इससे शरीर में पानी की कमी नहीं होगी। विजातीय पदार्थ पेशाब के जरिये बाहर निकलते रहेंगे।

९) सौंफ़ और जीरा बराबर मात्रा में लेकर तवे पर स्रेक लें और पावडर बनालें। ५ ग्राम चूर्ण पानी के साथ हर तीन घंटे के फ़ासले से लेते रहें। बहुत गुणकारी उपाय है।

१०) जीरा तवे पर सेक लें। पाव भर खट्टी छाछ में २-३ ग्राम जीरा-पावडर डालकर और इसमे आधा ग्राम काला नमक मिलाकर दिन में तीन बार पीने से अतिसार का ईलाज होता है।

११) ५० ग्राम शहद पाव भर पानी में मिलाकर पीने से दस्त नियंत्रण में आ जाते हैं।

१२) आधा चम्मच मैथी के बीज,आधा चम्मच जीरा सिका हुआ और इसमें ५० ग्राम दही मिलाकर पीने से अतिसार रोग में बहुत लाभ होता है।
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उपवास (फ़ास्टिंग) क्यों और कैसे करें?
विधि पूर्वक उपवास के माध्यम से शरीर की स्वयं का ईलाज करने की आंतरिक शक्ति को अधिकतम कार्यक्छम बनाया जा सकता है।संपूर्ण विश्राम अवस्था में शरीर में पानी अथवा फ़लों के रस के अलावा कुछ नहीं लेना उपवास कहलाता है।
गंभीर रोगों से ग्रसित व्यक्ति को जीवन शैली में वांछित बदलाव करना जरूरी होता है। उपवास करने के बाद जीवन शैली में बदलाव करना आसान हो जाता है। उपवास की सबसे उत्तम और सुरक्छित विधि फ़लों के रस पर आधारित उपवास है। केवल पानी पर आधारित उपवास भी प्रचलित है और बहुत वर्षों पुराना उपवास का विधान है। लेकिन उपवास संबंधी विशिष्ट चिकित्सकों का मत है कि फ़लों के रस पर आधारित उपवास बनिस्बत सुरक्छित और अधिक कारगर रहता है।
उपवास के दौरान शरीर में एकत्रित विजातीय पदार्थ( टाक्सिक मेटर) भस्म होने लगते हैं और शरीर से बाहर निकलने लगते हैं। इस निष्कासन की प्रक्रिया को सहारा देने के लिये हम पानी के बजाय फ़लों का क्छारीय( अल्केलाईन) रस इस्तेमाल करते हैं। इससे यूरिक एसीड व अन्य विजातीय पदार्थ आसानी से निष्काशित होंगे। हां ,ज्यूस में जो शर्करा होती है उससे हृदय को भी शक्ति मिलती रहेगी। हरी सजियों के रस में और फ़लों के रस में जो विटामिन, मिनरल्सऔर सूक्छ्म पौषक तत्व होते हैं वे हमारे शरीर की प्रणालियों को चुस्त-दुरुस्त बनाने में जुट जाते हैं। सभी ज्यूस ताजे फ़लों और सब्जियों से निकालकर तुरंत पीना चाहिए।फ़्रीज में रखे ज्यूस लाभदायक नहीं होते हैं।
उपवास शुरू करने के पहिले एनीमा लगाकर आंतों की भली प्रकार सफ़ाई कर लेना चाहिये।अवशिष्ट पदार्थ आंतों में जमे रहेंगे तो पेट में गेस बनने से तकलीफ़ होगी। बाद में उपवास की अवधि में एक दिन छोडकर एनीमा व्यवहार में लाना चाहिये।जब प्यास लगे तो मामूली गरम जल पर्याप्त मात्रा में पीना चाहिये। आप चाहें तो ज्यूस में पानी मिलाकर डायलुट करके पी सकते हैं। दिन भर में कुल तरल ६ से ८ गिलास (ज्यूस और पानी) पीना उत्तम है
उपवास के दौरान शरीर में उपस्थित विजातीय पदार्थों को बाहर निकालने में काफ़ी ऊर्जा खर्च होती है। इसलिये रोगी को संपूर्ण विश्राम की सलाह दी जाती है। मानसिक तनाव तो बिल्कुल भी नहीं रहना चाहिये। केवल चहल कदमी करने की अनुमति रहती है।
कितने दिन का उपवास करें?
उपवास कम से कम ५ दिन और अधिकतम ४० दिन का किया जा सकता है। उपवास के अवधि में आपको थकावट ,मितली,उल्टी होना,दस्त लगना, पेट में दर्द होना,पेट फ़ूलना,जोडों में दर्द,सिर दर्द,चमडी में खुल्जली होना, घबराहट आदि सामान्य लक्छणों का अनुभव होगा। यह इसलिये होता है कि विजातीय पदार्थ बाहर निकलने की प्रक्रिया में ज्यादा मात्रा में रक्त प्रवाह में आ जाते हैं। रक्त में इनकी मात्रा ज्यादा होने से ऊपरोक्त लक्छण प्रकट होते हैं।
उपवास विधि का प्रयोग करके शराब ,धूम्रपान,कोकेन गांजा आदि मादक द्रव्य सेवन करने की आदत से मुक्ति पाई जा सकती है। साधारण अवस्था में इन पदार्थों का सेवन बंद करने पर जो विथड्राल सिम्पटम पैदा होते हैं वे उपवास करने पर नहीं होते हैं। बहुत से लोगों को आश्चर्य होता है कि उपवास विधि से शराब और धूम्रपान बडी आसानी से छोडा जा सकता है। मोटापा दूर करने के लिये उपवास विधि का सहारा लेना सर्वोत्तम उपाय है। एक ताजा अध्ययन में बताया गया है कि उपवास के जरिये केन्सर रोग में भी लाभ उठाया जा सकता है।
Posted by dr.aalok dayaram at 3:44:00 PM 6 comments Links to this post
Labels: उपवास

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08 June 2010
पैरों का शौथ(oedema of feet) निवारण के घरेलू उपचार
पैरों का शौथ रोग में ऊतकों में असामान्य मात्रा में जल एकत्रित होने लगता है जिससे पैर शौथ युक्त हो जाते हैं। शौथ अक्सर टखनों,पैर और टांगों की जगह पर आता है। शौथ के प्रमुख कारण निम्न हो सकते हैं-
१. अधिक समय तक खडे रहना।
२. आर्तव काल (मासिक धर्म।
३.हार्मोन स्तर में तब्दीली होना।
४. गर्भ काल( प्रेग्नेन्सी)
५. मोटापा
६. वृद्धावस्था
७. चौंट लगना
पांवों मे सूजन रोग का घरेलू ईलाज और उपचार कैसे करें?
१. सबसे पहली और महत्व पूर्ण बात यह है कि नमक का उपयोग बंद कर दें। नमक सेवन करते रहने से हालत ज्यादा बिगड जाएगी।

२. सरसों के तेल की मालिश से लाभ होता है।

३. नित्य पकाये हुए चावल खाना चाहिये।

४. सूजन की जगह ककडी की चीरें रखें और उसके ऊपर आलू की चीरें रखकर पट्टी बांधें। बढिया उपाय है।

५. भोजन में प्रोटीन की प्रधानता रखनी चाहिये।दालों का भरपूर उपयोग करें।वसा युक्त भोजन पदार्थ भी उपयोग करना हितकारी है।

६. कर्बोहाईड्रेट प्रधानता वाले पदार्थों में पानी एकत्र करने के गुण होते हैं इसलिये ऐसे पदार्थों का उपयोग न्युनतम करें।

७. गर्भवती स्त्री के पैरों में सूजन होने पर पत्ता गोभी के पत्ते लगाकर पट्टी बंधना हितकर है।सोने से पहिले पैरों पर ठंडे पानी की धार लगाना लाभप्रद रहता हैं।

८. रेशे वाले पदार्थ भी सूजन बढाने में सहायक होते हैं हरी सब्जीयां और फ़लों का उपयोग कम कर देना चाहिये।

९. धूम्रपान और शराब सेवन से शौथ रोग उग्र हो जाता है। अत: ये पदार्थ त्याज्य हैं।

१०. सोते वक्त अपने पैरों को शरीर से ऊंचा रखें। पांव के नीचे तकिया रखना उपयोगी रहता है।

११. धनिये के बीज ३-४ चम्मच दो कप पानी में तब तक ऊबालें कि आधा रह जाए। रोजाना पीयें। बहुत लाभदायक उपचार है। आजमाएं।

१२. अधिक मात्रा में पानी पीने से भी परहेज करना चाहिये। ज्यादा पानी पीने से सूजन ज्यादा बढेगी।

१३. शौथ अपने आप में कोई रोग नहीं है बल्कि यह संकेत देता है कि हमारे शरीर के सिस्टम ठीक से काम नहीं कर रहे हैं। इसे गंभीरता से लेना चाहिये। कुछ ही दिनों में नियंत्रण नहीं होने पर कुशल चिकित्सक से संपर्क करना चाहिये। गुर्दे और हृदय की गंभीर बीमारियों से भी शरीर में सूजन आने लगता है।

१४.. आयुर्वेदिक चिकित्सा में पुनर्नवासव का उपयोग लाभप्रद माना गया है।

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कुदरती पदार्थों से करें कब्ज (कांस्टीपेशन) का इलाज.
अनियमित खान-पान के चलते लोगों में कब्ज एक आम बीमारी की तरह प्रचलित है। यह पाचन तन्त्र का प्रमुख विकार है। मनुष्यों मे मल निष्कासन की फ़्रिक्वेन्सी अलग अलग पाई जाती है। किसी को दिन में एक बार मल विसर्जन होता है तो किसी को दिन में २-३ बार होता है। कुछ लोग हफ़्ते में २ य ३ बार मल विसर्जन करते हैं। ज्यादा कठोर,गाढा और सूखा मल जिसको बाहर धकेलने के लिये जोर लगाना पडे यह कब्ज रोग का प्रमुख लक्छण है।ऐसा मल हफ़्ते में ३ से कम दफ़ा आता है और यह इस रोग का दूसरा लक्छण है। कब्ज रोगियों में पेट फ़ूलने की शिकायत भी साथ में देखने को मिलती है। यह रोग किसी व्यक्ति को किसी भी आयु में हो सकता है हो सकता है लेकिन महिलाओं और बुजुर्गों में कब्ज रोग की प्राधानता पाई जाती है।

कब्ज निवारक नुस्खे इस्तेमाल करने से कब्ज का निवारण होता है और कब्ज से होने वाले रोगों से भी बचाव हो जाता है--

१---कब्ज का मूल कारण शरीर मे तरल की कमी होना है। पानी की कमी से आंतों में मल सूख जाता है और मल निष्कासन में जोर लगाना पडता है। अत: कब्ज से परेशान रोगी को दिन मे २४ घंटे मे मौसम के मुताबिक ३ से ५ लिटर पानी पीने की आदत डालना चाहिये। इससे कब्ज रोग निवारण मे बहुत मदद मिलती है।

२...भोजन में रेशे की मात्रा ज्यादा रखने से कब्ज निवारण होता है।हरी पत्तेदार सब्जियों और फ़लों में प्रचुर रेशा पाया जाता है। मेरा सुझाव है कि अपने भोजन मे करीब ७०० ग्राम हरी शाक या फ़ल या दोनो चीजे शामिल करें।

३... सूखा भोजन ना लें। अपने भोजन में तेल और घी की मात्रा का उचित स्तर बनाये रखें। चिकनाई वाले पदार्थ से दस्त साफ़ आती है।

४..पका हुआ बिल्व फ़ल कब्ज के लिये श्रेष्ठ औषधि है। इसे पानी में उबालें। फ़िर मसलकर रस निकालकर नित्य ७ दिन तक पियें। कज मिटेगी।

५.. रात को सोते समय एक गिलास गरम दूध पियें। मल आंतों में चिपक रहा हो तो दूध में ३ -४ चम्मच केस्टर आईल (अरंडी तेल) मिलाकर पीना चाहिये।

६..इसबगोल की की भूसी कब्ज में परम हितकारी है। दूध या पानी के साथ २-३ चम्मच इसबगोल की भूसी रात को सोते वक्त लेना फ़ायदे मंद है। दस्त खुलासा होने लगता है।यह एक कुदरती रेशा है और आंतों की सक्रियता बढाता है।

७..नींबू कब्ज में गुण्कारी है। मामुली गरम जल में एक नींबू निचोडकर दिन में २-३बार पियें। जरूर लाभ होगा।

८..एक गिलास दूध में १-२ चाम्मच घी मिलाकर रात को सोते समय पीने से भी कब्ज रोग का समाधान होता है।

९...एक कप गरम जल मे १ चम्म्च शहद मिलाकर पीने से कब्ज मिटती है। यह मिश्रण दिन मे ३ बार पीना हितकर है।

१०.. जल्दी सुबह उठकर एक लिटर गरम पानी पीकर २-३ किलोमीटर घूमने जाएं। बहुत बढिया उपाय है।

११..दो सेवफ़ल प्रतिदिन खाने से कब्ज में लाभ होता है।

१२..अमरूद और पपीता ये दोनो फ़ल कब्ज रोगी के लिये अमॄत समान है। ये फ़ल दिन मे किसी भी समय खाये जा सकते हैं। इन फ़लों में पर्याप्त रेशा होता है और आंतों को शक्ति देते हैं। मल आसानी से विसर्जीत होता है।

१२..अंगूर मे कब्ज निवारण के गुण हैं । सूखे अंगूर याने किश्मिश पानी में ३ घन्टे गलाकर खाने से आंतों को ताकत मिलती है और दस्त आसानी से आती है। जब तक बाजार मे अंगूर मिलें नियमित रूप से उपयोग करते रहें।

13..एक और बढिया तरीका है। अलसी के बीज का मिक्सर में पावडर बनालें। एक गिलास पानी मे २० ग्राम के करीब यह पावडर डालें और ३-४ घन्टे तक गलने के बाद छानकर यह पानी पी जाएं। बेहद उपकारी ईलाज है।

१४.. पालक का रस या पालक कच्चा खाने से कब्ज नाश होता है। एक गिलास पालक का रस रोज पीना उत्तम है। पुरानी कब्ज भी इस सरल उपचार से मिट जाती है।

१५.. अंजीर कब्ज हरण फ़ल है। ३-४ अंजीर फ़ल रात भर पानी में गलावें। सुबह खाएं। आंतों को गतिमान कर कब्ज का निवारण होता है।

16.. मुनका में कब्ज नष्ट करने के तत्व हैं। ७ नग मुनक्का रोजाना रात को सोते वक्त लेने से कब्ज रोग का स्थाई समाधान हो जाता है।

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दमा रोग ठीक करने के आसान उपाय . :How to cure asthama with home remedies?
श्वास अथवा दमा श्वसन तंत्र की भयंकर कष्टदायी बीमारी है। यह रोग किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है।श्वास पथ की मांसपेशियों में आक्छेप होने से सांस लेने निकालने में कठिनाई होती है।खांसी का वेग होने और श्वासनली में कफ़ जमा हो जाने पर तकलीफ़ ज्यादा बढ जाती है।रोगी बुरी तरह हांफ़ने लगता है।

एलर्जी पैदा करने वाले पदार्थ या वातावरण के संपर्क में आने से,बीडी,सिगरेट धूम्रपान करने से,ज्यादा सर्द या ज्यादा गर्म मौसम,सुगन्धित पदार्थों,आर्द्र हवा,ज्यादा कसरत करने और मानसिक तनाव से दमा का रोग उग्र हो जाता है।

यहां ऐसे घरेलू नुस्खों का उळ्लेख किया जा रहा है जो इस रोग ठीक करने,दौरे को नियंत्रित करने,और श्वास की कठिनाई में राहत देने वाल सिद्ध हुए हैं--

१) तुलसी के १५-२० पत्ते पानी से साफ़ करलें फ़िर उन पर काली मिर्च का पावडर बुरककर खाने से दमा मे राहत मिलती है।

२) एक केला छिलका सहित भोभर या हल्की आंच पर भुन लें। छिलका उतारने के बाद काली मिर्च का पावडर उस पर बुरककर खाने से श्वास की कठिनाई तुरंत दूर होती है।

३) दमा के दौरे को नियंत्रित करने के लिये हल्दी एक चम्मच दो चम्मच शहद में मिलाकर चाटलें।

४) तुलसी के पत्ते पानी के साथ पीस लें ,इसमें दो चम्मच शहद मिलाकर सेवन करने से दमा रोग में लाभ मिलता है।

५) पहाडी नमक सरसों के तेल मे मिलाकर छाती पर मालिश करने से फ़ोरन शांति मिलती है।

६) मैथी के बीज १० ग्राम एक गिलास पानी मे उबालें तीसरा हिस्सा रह जाने पर ठंडा करलें और पी जाएं। यह उपाय दमे के अलावा शरीर के अन्य अनेकों रोगों में फ़ायदेमंद है।

७) एक चम्मच हल्दी एक गिलास दूध में मिलाकर पीने से दमा रोग काबू मे रहता है।एलर्जी नियंत्रित होती है।

८) सूखे अंजीर ४ नग रात भर पानी मे गलाएं,सुबह खाली पेट खाएं।इससे श्वास नली में जमा बलगम ढीला होकर बाहर निकलता है।

९) सहजन की पत्तियां उबालें।छान लें उसमें चुटकी भर नमक,एक चौथाई निंबू का रस,और काली मिर्च का पावडर मिलाकर पियें।दमा का बढिया इलाज माना गया है।

१०) शहद दमा की अच्छी औषधि है।शहद भरा बर्तन रोगी के नाक के नीचे रखें और शहद की गन्ध श्वास के साथ लेने से दमा में राहत मिलती है।

११) दमा में नींबू का उपयोग हितकर है।एक नींबू का रस एक गिलास जल के साथ भोजन के साथ पीना चाहिये।

१२) लहसुन की ५ कली चाकू से बारीक काटकर ५० मिलि दूध में उबालें।यह मिक्श्चर सुबह-शाम लेना बेहद लाभकारी है।

१३)-अनुसंधान में यह देखने में आया है कि आंवला दमा रोग में अमृत समान गुणकारी है।एक चम्मच आंवला रस मे दो चम्मच शहद मिलाकर लेने से फ़ेफ़डे ताकतवर बनते हैं।

14) दमे का मरीज उबलते हुए पानी मे अजवाईन डालकर उठती हुई भाप सांस में खींचे ,इससे श्वास-कष्ट में तुरंत राहत मिलती है।

१५) लौंग ४-५ नग लेकर १०० मिलिलिटर पानी में उबालें आधा रह जाने पर छान लें और इसमें एक चम्मच शहद मिलाकर गरम गरम पीयें। ऐसा काढा बनाकर दिन में तीन बार पीने से रोग नियंत्रित होकर दमे में आशातीत लाभ होता है।

१६) चाय बनाते वक्त २ कली लहसुन की पीसकर डाल दें। यह दमे में राहत पहुंचाता है। सुबह-शाम पीयें।
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यकॄत रोग और उनका कुदरती नुस्खों से समाधान.how to cure liver diseases?

यकृत वृद्धि (हेपाटोमेगेली) के अचूक नुस्खे

यकृत का बढना यकृत में विकार पैदा हो जाने की ओर संकेत करता है। इसी को हेपटोमेगेली कहते हैं। बढे हुए और शोथ युक्त लिवर के कोइ विशेष लक्छ्ण नहीं होते हैं। यह रोग लिवर के केन्सर,खून की खराबी,अधिक शराब सेवन, और पीलिया के कारण उत्पन्न हो सकता है। यहां मैं यकृत वृद्धि रोग के कुछ आसान नुस्खे प्रस्तुत कर रहा हूं जिनके समुचित प्रयोग से इस रोग को ठीक किया जा सकता है।

१) अजवाईन ३ ग्राम और आधा ग्राम नमक भोजन के बाद पानी के साथ लेने से लिवर-तिल्ली के सभी रोग ठीक होते हैं।

२) .दो सन्तरे का रस खाली पेट एक सप्ताह तक लेने से लिवर सुरक्छित रहता है।

३) एक लम्बा बेंगन प्रतिदिन कच्चा खाने से लिवर के रोग ठीक होते हैं।

४) दिन भर में ३ से ४ लिटर पानी पीने की आदत डालें।

५) एक पपीता रोज सुबह खाली पेट खावें। एक माह तक लेने से लाभ होगा। पपीता खाने के बाद दो घन्टे तक कुछ न खावें।

६) कडवी सहजन की फ़ली,करेला, गाजर,पालक और हरी सब्जीयां प्रचुर मात्रा में भोजन में शामिल करें।

७) शराब पीना लिवर रोगी के लिये मौत को बुलावा देने के समान है। शराब हर हालत में त्याग दें।

८) चाय पीना हानिकारक है। भेंस के दूध की जगह गाय या बकरी का दूध प्रयोग करें।

९) मछली,अण्डे और दालें लाभप्रद हैं।

१०) भोजन कम मात्रा में लें। तली-गली,मसालेदार चीजों से परहेज करें।

११) मुलहठी में लिवर को ठीक रखने के गुण मौजूद होते हैं। पान खाने वाले मुलहटी पान में शामिल करें।

१२) आयुर्वेदिक मत से कुमारी आसव इस रोग की महौषधि है।

१३) होमियोपेथी के चिकित्सक चाईना,ब्रायोनिया, फास्फोरस आदि औषधियां मिलाकर या सिंगल रेमेडी सिद्धात के मुताबिक चिकित्सा करते हैं।

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सफ़ेद दाग(ल्युकोडर्मा) का ईलाज ऐसे करें.:how to treat leucoderma?
सफ़ेद दाग निवारक नुस्खे


ल्युकोडर्मा चमडी का भयावह रोग है,जो रोगी की शक्ल सूरत प्रभावित कर शारीरिक के बजाय मानसिक कष्ट ज्यादा देता है।इसे ही श्वेत कुष्ठ कहते हैं। इस रोग में चमडे में रंजक पदार्थ जिसे पिग्मेन्ट मेलानिन कहते हैं,की कमी हो जाती है।चमडी को प्राकृतिक रंग प्रदान करने वाले इस पिग्मेन्ट की कमी से सफ़ेद दाग पैदा होता है। यह चर्म विकृति पुरुषों की बजाय स्त्रियों में ज्यादा देखने में आती है।
ल्युकोडर्मा के दाग हाथ,गर्दन,पीठ और कलाई पर विशेष तौर पर पाये जाते हैं। अभी तक इस रोग की मुख्य वजह का पता नहीं चल पाया है।लेकिन चिकित्सा के विद्वानों ने इस रोग के कारणों का अनुमान लगाया है।पेट के रोग,लिवर का ठीक से काम नहीं करना,दिमागी चिंता ,छोटी और बडी आंर्त में कीडे होना,टायफ़ाईड बुखार, शरीर में पसीना होने के सिस्टम में खराबी होने आदि कारणों से यह रोग पैदा हो सकता है।
शरीर का कोई भाग जल जाने अथवा आनुवांशिक करणों से यह रोग पीढी दर पीढी चलता रहता है।इस रोग को नियंत्रित करने और चमडी के स्वाभाविक रंग को पुन: लौटाने हेतु कुछ घरेलू नुस्खे बेहद कारगर साबित हुए हैं जिनका विवेचन निम्न पंक्तियों में किया जा रहा है--

१) दस लीटर पानी में आधा किलो हल्दी का पावडर मिलाकर तेज आंच पर उबालें जब ४ लीटर के करीब रह जाय तब उतारकर ठंडा करलें और इसमें आधा किलो सरसों का तेल मिला दें,यह दवा सफ़ेद दाग पर दिन में दो बार लगावें। ४-५ माह तक ईलाज चलाने पर अनुकूल परिणाम प्राप्त होते हैं।

२.) बाबची के बीज इस बीमारी की प्रभावी औषधि मानी गई है।५० ग्राम बीज पानी में ३ दिन तक भिगोवें। पानी रोज बदलते रहें।बीजों को मसलकर छिलका उतारकर छाया में सूखालें। पीस कर पावडर बनालें।यह दवा डेढ ग्राम प्रतिदिन पाव भर दूध के साथ पियें। इसी चूर्ण को पानी में घिसकर पेस्ट बना लें। यह पेस्ट सफ़ेद दाग पर दिन में दो बार लगावें। अवश्य लाभ होगा। दो माह तक ईलाज चलावें।

3) बाबची के बीज और ईमली के बीज बराबर मात्रा में लेकर ४ दिन तक पानी में भिगोवें। बाद में बीजों को मसलकर छिलका उतारकर सूखा लें। पीसकर महीन पावडर बनावें। इस पावडर की थोडी सी मात्रा लेकर पानी के साथ पेस्ट बनावें। यह पेस्ट सफ़ेद दाग पर एक सप्ताह तक लगाते रहें। बहुत कारगर नुस्खा है।लेकिन यदि इस पेस्ट के इस्तेमाल करने से सफ़ेद दाग की जगह लाल हो जाय और उसमें से तरल द्रव निकलने लगे तो ईलाज रोक देना उचित रहेगा।

4) एक और कारगर नुस्खा बताता हूं--

लाल मिट्टी लावें। यह मिट्टी बरडे- ठरडे और पहाडियों के ढलान पर अक्सर मिल जाती है। अब यह लाल मिट्टी और अदरख का रस बराबर मात्रा में लेकर घोटकर पेस्ट बनालें। यह दवा प्रतिदिन ल्युकोडेर्मा के पेचेज पर लगावें। लाल मिट्टी में तांबे का अंश होता है जो चमडी के स्वाभाविक रंग को लौटाने में सहायता करता है। और अदरख का रस सफ़ेद दाग की चमडी में खून का प्रवाह बढा देता है।

५) श्वेत कुष्ठ रोगी के लिये रात भर तांबे के पात्र में रखा पानी प्रात:काल पीना फ़ायदेमंद है।

6) मूली के बीज भी सफ़ेद दाग की बीमारी में हितकर हैं। करीब ३० ग्राम बीज सिरका में घोटकर पेस्ट बनावें और दाग पर लगाते रहने से लाभ होता है।
उक्त सरल उपाय अपनाकर ल्युकोडर्मा रोग को नष्ट करें और अपने विचार टिफ्पणी के रूप में लिखें।
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